तिरुपति लड्डू विवाद में पवन कल्याण का टीटीडी पूर्व प्रमुखों पर हमला, कहा-'शायद इन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया'
Tirupati Balaji Prasad Controversy: आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम के पूर्व प्रमुखों वाईवी सुब्बा रेड्डी और भूमना करुणाकर रेड्डी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने संभवतः ईसाई धर्म अपना लिया है। जिससे मंदिर में चढ़ाए जाने वाले तिरुपति लड्डू की पवित्रता पर प्रश्न उठ रहे हैं। डिप्टी सीएम का यह बयान तब सामने आया है। जब मंदिर प्रथाओं की पवित्रता पर एक बड़ी बहस छिड़ी हुई है। इससे तिरुपति लड्डू को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।
डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने विजयवाड़ा के कनक दुर्गा मंदिर में शुद्धिकरण अनुष्ठान के बाद इस विवाद पर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने तिरुपति बालाजी धाम में प्रसाद की पवित्रता से छेड़छाड़ के प्रयासों पर गहरी व्यक्तिगत पीड़ा व्यक्त की। इस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 11 दिवसीय तपस्या की घोषणा की। जो उन्होंने पिछली सरकार द्वारा किए गए पापों के प्रायश्चित के रूप में की।

इस विवाद को और हवा तब मिली जब मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने तिरुपति लड्डू में मिलावटी घी के इस्तेमाल का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि लड्डू में जानवरों की चर्बी मिलाई गई है। इन आरोपों को टीटीडी के पूर्व प्रमुख भूमना करुणाकर रेड्डी ने खारिज किया। रेड्डी ने इसे निराधार और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से प्रेरित बताते हुए कहा कि यह मंदिर की छवि धूमिल करने की साजिश है।
आंध्र प्रदेश साधु परिषद के अध्यक्ष स्वामी श्रीनिवासनंद सरस्वती ने भी इस विवाद में हस्तक्षेप करते हुए वाईएस जगन मोहन रेड्डी पर आरोप लगाया कि वे तिरुमाला मंदिर को एक व्यवसायिक स्थल की तरह चला रहे हैं। उनका मानना है कि तिरुमाला की पवित्रता से समझौता किया जा रहा है। जो भक्तों के बीच गहरी चिंता का कारण है।
वाईवी सुब्बा रेड्डी ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। जिसमें मंदिर में घी के इस्तेमाल से जुड़े दावों की जांच के लिए एक पैनल गठित करने की मांग की गई है। यह कदम मंदिर की पवित्रता को बनाए रखने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
पवन कल्याण ने 11 दिवसीय प्रायश्चित की घोषणा की और तिरुपति में व्यक्तिगत रूप से क्षमा याचना के लिए जाने की बात कही। उनके इस कदम को आस्था और राजनीति के मिश्रण के रूप में देखा जा रहा है। जिसका उद्देश्य मंदिर की पवित्रता बहाल करना और जनता का विश्वास जीतना है।
तिरुपति लड्डू विवाद ने न केवल धार्मिक बल्कि राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। यह मुद्दा आस्था, पवित्रता और राजनीतिक जवाबदेही के बीच टकराव का प्रतीक बन गया है। जैसे-जैसे यह कानूनी और आध्यात्मिक लड़ाई आगे बढ़ रही है। भक्त और नेता मंदिर की पारदर्शिता और पवित्रता की बहाली की मांग कर रहे हैं। आने वाले समय में इस विवाद का परिणाम आंध्र प्रदेश की धार्मिक और राजनीतिक परिदृश्य पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।












Click it and Unblock the Notifications