कर्मचारियों के महंगाई भत्ते पर रोक लगाने के सरकार के फैसले को वापस लेने की मांग

नई दिल्ली। देश में कोविड-19 संकट के कारण अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान हो रहा है। जिसके चलते सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाले डीए यानी महंगाई भत्ते की बढ़ी हुई इंस्टॉलमेंट पर रोक लगा दी थी। महंगाई भत्ते की बढ़ोतरी पर लगी ये रोक एक जुलाई 2021 तक जारी रहेगी। सरकार के इस फैसले पर फिर से पुनर्विचार करने या वापस लेने की मांग की जा रही है। भारतीय रेल के सबसे बड़े कर्मचारी फेडरेशन- आल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी शिव गोपाल मिश्रा ने कहा है कि सरकार को महंगाई भत्ते पर रोक लगाने के फैसले पर पुनर्विचार कर उसे फिर से बहाल करना चाहिए।

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एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, शिव गोपाल मिश्रा ने एक वीडियो स्टेटमेंट में कहा, 'डीए को फ्रीज करने का फैसला गलत है। इससे औसतन एक रेल कर्मचारी की करीब डेढ़ महीने की सैलरी घट जाएगी। पेंशन धारियों को भी नुकसान होगा।' उन्होंने आगे कहा, 'मैंने आज सेक्रेटरी, पर्सनल (कार्मिक सचिव) सी चंद्रमौली जी से बात कर उनसे फैसले पर पुनर्विचार करने की गुजारिश की है। मैं कैबिनेट सचिव को भी चिट्ठी लिखने वाला हूं। हम चाहते हैं कि भारत सरकार डीए फ्रीज के फैसले पर पुनर्विचार करे और पुरानी व्यवस्था फिर से बहाल करे।'

बता दें मार्च में केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारियों के लिए महंगाई भत्ते में 5 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। इस इजाफे के बाद सरकारी कर्मियों को 21 फीसदी महंगाई भत्ता मिलने की आशा थी, लेकिन बाद में सरकार ने डीए बढ़ोतरी पर रोक को जुलाई 2021 तक लागू कर दिया। केंद्र सरकार के इस फैसले से करीब 48 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 65 लाख पेंशनधारियों पर असर पड़ने का अनुमान है। लेकिन सरकार को कोरोना संकट से लड़ने के लिए राशि जरूर मिल जाएगी।

कर्मियों के महंगाई भत्ते में इजाफा रुकने से केंद्र सरकार को कुल 37,530 करोड़ रुपये मिल जाएंगे। खास बात यह है कि राज्य सरकारें भी केंद्र सरकार के इस फैसले का अनुसरण करते हुए अपने कर्मियों के महंगाई भत्ते को रोक सकती हैं। अगर ऐसा हुआ तो राज्यों को 82,566 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। इस तरह केंद्र और राज्यों दोनों को महंगाई भत्ता रोकने से 1.20 लाख करोड़ रुपये का फायदा हो सकता है।

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