Indian Economy: मनरेगा के तहत मांग ग्रामीण संकट का सही संकेतक नहीं है: इकोनॉमी सर्वे
Indian Economy: वित्त मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 में इस बात पर जोर दिया गया है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत रोजगार की मांग ग्रामीण संकट को सही ढंग से नहीं दर्शाती है। आम धारणा के विपरीत वित्त वर्ष 23 के आंकड़ों से पता चलता है कि उच्च ग्रामीण बेरोजगारी दर वाले राज्यों ने जरूरी नहीं कि सबसे ज्यादा मनरेगा फंड का इस्तेमाल किया हो।
तमिलनाडु जैसे राज्य जिसमें भारत की गरीब आबादी का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा है। इस राज्य ने वित्त वर्ष 24 में जारी किए गए सभी मनरेगा फंड का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा लिया। इसी तरह केरल में गरीब आबादी का केवल 0.1 प्रतिशत हिस्सा है। इस राज्य ने देश के मनरेगा फंड का लगभग 4 प्रतिशत इस्तेमाल किया। इन राज्यों ने मिलकर 51 करोड़ व्यक्ति प्रतिदिन दिन रोजगार पैदा किए हैं।

2005 में लागू किए गए मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों के लिए आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना है। जिसके तहत प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों के रोजगार की गारंटी मजदूर परिवार को दी जाती है। जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम के लिए स्वेच्छा से काम करते हैं। हालांकि सर्वेक्षण में इस बात पर जोर दिया गया है कि राज्यों में मनरेगा फंड का उपयोग ग्रामीण संकट के अलावा अन्य कारकों से भी प्रभावित होता है।
बिहार और उत्तर प्रदेश में भारत की गरीब आबादी का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा हैं। इन राज्यों ने वित्त वर्ष 2024 में मनरेगा फंड का केवल 17 प्रतिशत उपयोग किया है। इन दोनों राज्यों ने 53 करोड़ व्यक्ति प्रतिदिन रोजगार दिया है।
Demand under MGNREGS is not a true indicator of rural distress: Eco Survey
— ANI Digital (@ani_digital) July 22, 2024
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सर्वेक्षण में बताया गया है कि मनरेगा कार्य की मांग सीधे तौर पर ग्रामीण संकट से जुड़ी नहीं है। बल्कि यह राज्य की संस्थागत क्षमता और न्यूनतम मजदूरी में भिन्नता से प्रभावित होती है। हरियाणा, केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में प्रति व्यक्ति आय की तुलना में मनरेगा के तहत अधिसूचित मजदूरी दरें अधिक हैं। यह राज्यवार निधि उपयोग को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है। क्योंकि मजदूरी घटक पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाता है।
इसके अलावा प्रभावी कार्यान्वयन और संस्थागत क्षमता एमजीएनआरईजीएस फंड के उपयोग को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बेहतर प्रशासनिक तंत्र और उच्च अधिसूचित मजदूरी दर वाले राज्य ग्रामीण संकट या बेरोजगारी के अपने वास्तविक स्तरों की परवाह किए बिना अधिक धन का उपयोग करते हैं।












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