दिल्ली हिंसा पर कथित झूठी खबर को लेकर वॉल स्ट्रीट जर्नल के खिलाफ शिकायत पर MEA ने कही ये बात

नई दिल्ली। दिल्ली हिंसा के दौरान आईबी अधिकारी अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्री जर्नल ने एक खबर लिखी थी, जिसके बाद अखबार के संपादक के खिलाफ शिकाय दर्ज की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अखबार ने एक खास धर्म को बदनाम करने और सांप्रदायिकक तनाव को फैलान की कोशिश की है। इसके बाद खबर सामने आई थी कि विदेश मंत्रालय ने अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास से कहा है कि वॉल स्ट्रीट जर्नल के साउथ एशिया डेप्युटी चीफ एरिक बेलमैन को भारत विरोधी गतिविधि के चलते भारत निर्वासित किया जाए। लेकिन विदेश मंत्रालय की ओर से इस खबर पर सफाई दी गई है।

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वॉल स्ट्रीट जर्नल के खिलाफ दर्ज कराई गई थी शिकायत
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बताया कि एरिक बेलमैन के खिलाफ सरकार के शिकायती पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत मिलने के बाद तय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाती है और इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। लेकिन निर्वासन को लेकर अभी तक विदेश मंत्रालय की ओर से कोई फैसला नहीं लिया गया है। दरअसल 26 फरवरी को वॉल स्ट्रीट जर्नल ने दिल्ली हिंसा को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमे आईबी अधिकारी अंकित शर्मा के भाई अंकुर के बयान का जिक्र किया गया था। लेकिन अंकित शर्मा के भाई कहा कि उन्होंने वॉल स्ट्रीट जर्नल को कोई बयान नहीं दिया है। बता दें कि दिल्ली हिंसा के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या कर दी गई थी।

अंकित शर्मा ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया झूठा
वॉल स्ट्रीट की रिपोर्ट में अंकुर शर्मा के हवाले से कहा गया है कि जब अंकित शर्मा घर आ रहे थे तो कुछ लोग हाथ में पत्थर, रॉड और चाकू लेकर घर में घुस गए, ये लोग जय श्री राम के नारे लगा रहे थे। लेकिन अंकुर शर्मा ने इससे इनकार किया है और कहा कि वॉल स्ट्रीट जर्नल झूठ बोल रहा है। यह उन्हें और उनके परिवार को बदनाम करने की साजिश है। बता दें कि दिल्ली हिंसा के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था, जबकि सैकड़ों लोग इस हिंसा में घायल हो गए थे।

अमित शाह ने दिल्ली हिंसा पर दिया जवाब
दिल्ली हिंसा पर संसद में जवाब देते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि हमने अंकित शर्मा और कॉन्स्टेबल रतन लाल के हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया है। अमित शाह ने कहा कि दंगे के बाद अबतक 700 एफआईआर दर्ज की गई है। जिसने भी शिकायत की, एफआईआर दर्ज कराई गई है। 2647 लोगों को गिरफ्तार और हिरासत में लिया गया है। वैज्ञानिक तरीके से गिरफ्तारी हो रही है। 1922 लोगों की पहचान कर ली गई है। इन लोगों के चेहरे दंगा करते हुए, लोगों का नुकसान करते हुए, पथराव करते हुए, हत्या करते हुए दिख रहे हैं। 334 यूपी के लोग भी इसमे शामिल हैं। लोगों के चेहरे की पहचान उनके वोटर कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस के आंकड़े से किए गए हैं। आधार कार्ड के डेटा का इस्तेमाल नहीं किया गया है। आर्म्स एक्ट के 49 मामले दर्ज हुए हैं, 52 लोगों की गिरफ्तारी हुई है, जबकि तकरीबन 100 हथियार जब्त किए गए हैं।

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