दिल्‍ली प्रदूषण: क्या दमघोंटू जहरीली हवा से छुटकारा दिलाने में कारगर हैं एयर प्यूरिफायर

बेंगलुरु। दिल्ली और एनसीआर में हवा की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है। जिस कारण लोगों को सांस लेना दूभर हो चुका है। पिछले सात दिनों में हवा में घुल चुका प्रदूषण कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। एयर क्वालिटी एंड फॉरकस्टिंग एंड रिसर्च की ओर से जारी एयर गुणवत्ता इंडेक्‍स के मुताबिक सुबह 8 बजे हवा की गुणवत्ता 708 मापी गई। फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में रह रहे लोगों को इस दमघोंटू हवा से जल्‍द निजात मिलने वाली नही हैं।

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    बता दें दिल्ली और एनसीआर में पिछले कई दिनों से हवा की गुणवत्ता में आयी कमी के कारण वहां हेल्‍थ इमरजेंसी घोषित कर दी है। पांच तारीख तक स्‍कूलों को बंद कर दिया गया हैं। लेकिन घर में कैद होने के बावजूद उन्‍हें सांस लेने में परेशानी हो रही है। पिछले कई दिनों में अस्‍पतालों में श्‍वास के मरीजों की संख्‍या काफी बढ़ गयी है। ऐसे में लोगों के सामने शुद्ध हवा के लिए एयर प्‍यूरिफायर एक बेहतर विकल्‍प नजर आ रहा है। अब यह सवाल उठता है कि इस दमघोंटू वातावरण में एयर प्‍यूरिफायर क्या वाकई में असरदार साबित होगा?

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    बाजार में उपलब्‍ध एयर प्‍यूरिफायर का काम हवा में मौजूद दषित और हानिकारक तत्वों, वायरस और बैक्टीरिया या वायरस को खत्म करके हवा का शुद्ध करना है। घर में अगर एयर प्‍यूरिफायर लगा हो तो हवा के माध्यम से फैलने वाली छोटी-मोटी बीमारियां जैसे इन्फेक्शन का भी खतरा नहीं होता। यही नहीं ये अस्थमा, एलर्जी के मरीजों के लिए बेहद कारगर है। दिल और सांस के मरीजों की बात करें तो एयर प्यूरीफायर काफी फायदेमंद साबित हुए हैं। लेकिन फिर भी डॉक्टरों का कहना है कि इसके इस्तेमाल को लेकर अभी और अधिक शोध करने की जरूरत है।

    गौरतलब है कि एयर प्यूरिफायर वाकई शुद्ध हवा के लिए काफी असरदार होते है। बाजार में उपलब्‍ध एयर प्‍यूरिफायर का चयन स्‍थान के क्षेत्रफल के हिसाब से किया जाना चाहिए। मतलब जितना बड़ा स्‍थान होगा उसके हिसाब से फिल्‍टर का प्रयोग किया जाएगा। इसलिए एयर प्‍यूरिफायर का चयन करने से पहले आप जहां उसे लगाने वाले है उस जगह का माप कर लें। ऐसा इसलिए है क्योंकि प्‍यूरीफायर में लगे फिल्‍टर ही हवा को साफ करने का काम करते हैं। यह हवा में मौजूद पर्टिकुलेट मैटर और पोलन को समाप्‍त करनता है। जिससे हवा से साफ होती है।

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    बता दें प्‍यूरिफायर में कई प्रकार के फिल्‍टर होते हैं जिसमें सबसे महत्वपूर्ण है एचईपीए फिल्टर जिसमें हवा में मौजूद 99.97 प्रतिशत तक हानिकारक तत्वों फिल्टर करने की क्षमता है। ये 0.3 माइक्रोन जितने छोटे पार्टिकल को भी खत्म करता है। कमरे के क्षेत्रफल के हिसाब से एयर प्‍यूरिफायर हवा से स्‍वास्‍थ को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों को नष्‍ट करके हवा को शुद्ध करता हैं। एक औसत क्षेत्रफल कमरे की हवा लगभग 30 मिनट में शुद्ध हो जाती है। गौर करने वाली बात ये है कि वॉटर फिल्‍टर की ही तरह कुछ समय के बाद इसका भी फिल्टर बदलना पड़ता है। कुछ समय तक प्रयोग किए जाने के बाद इसके फिल्‍टर में गंदगी साफ देखी जा सकती है, बिल्कुल वैसी है जैसे हम वाटर प्यूरिफायर के फिल्टर पर जमीं हुई देखते हैं।

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    दिल्ली और एनसीआर में जैसी हवा की गुणवत्ता है ऐसे ही ज्यादा प्रदूषण वाले इलाकों में फिल्टर जल्दी बदलने पड़ते हैं नहीं तो प्यूरिफायर ठीक से काम नहीं करता। बाजार में कई बड़ी कंपनियों के एयर प्‍यूरिफायर मौजूद हैं। बाजार में उपलब्ध एयर प्यूरिफायर की कीमत 5-6 हजार से शुरू होकर 25-30 हजार हैं। फिर से बता दें कमरे के साइज और फिल्टर के हिसाब से कीमत अलग-अलग होती है।

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    चिकित्सकों के अनुसार दिल्ली और एनसीआर जैसी जगहों में एयर प्‍यूरिफायर का इस्‍तेमाल करना बेहतर होगा। जो लोग अधिकांश समय घर में रहते है और उनके कमरे सीलबंद है तो उनके लिए तो यह बहुत कारगर है। ऐसे में एयर प्यूरिफायर अच्छा विकल्‍प हैं। गौर करने वाली बात ये है कि घरों के कमरे पूरी तरह से सील नहीं होते, दरवाजे और खिड़कियों के जरिए हवा कमरे में आती ही है। लोग अंदर और बाहर आते-जाते रहते हैं इसलिए ये उतने प्रभावी साबित नहीं हो पाते। ये मास्क की तरह आपको भरोसा तो दे सकते हैं लेकिन ये समाधान नहीं हो सकते। इतना ही नहीं नौकरीपेशा लोग या घर के अन्‍य सदस्‍य दिन भर बाहर रहते हैं तो उनके फेफड़ो में खतरानाक प्रदूषण तो पहुंच ही जाता है। ऐसे में बाहर से घर में आकर इसकी शुद्ध हवा में बैठने से थोड़ा तो असर पड़ेगा ही।

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    2015 में हुए एक अध्‍ययन के अनुसार दिल्ली में हर 10 में से चार बच्‍चे फेफड़े की गंभीर बीमारियों से ग्रसित हैं। 2015 में प्रदूषण से हुई मौतों के मामले में 188 देशों की सूची में भारत पांचवें स्थान पर था. दुनियाभर में हुई करीब 90 लाख मौतों में से 28 प्रतिशत मौतें अकेले भारत में हुई है। दिल्ली और एनसीआर में पिछले दिनों जो दमघोंटू माहौल है ऐसे में यह रिपोर्ट और डराने वाली हैं। लोगों को अपना जीवन सुरक्षित रखने के लिए वास्तव में गंभीर होने की जरूरत है। ऐसे में मास्क के साथ-साथ एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल भी करेंगे तो कम से कम घर में दमघोंटू जहरीली हवा से निजाद पाकर शुद्ध हवा में श्‍वास ले सकेंगे।

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    खुली हवा में सांस लेना 40 सिगरेट पीने के बराबर

    दिल्ली के एनसीआर के शहरों गुरुग्राम, फरीदाबाद, गुरुग्राम, नोएडा और गाजियाबाद में वायु प्रदूषण के हालात एक जैसे ही हैं । दिल्ली की आबोहवा इतनी खराब हो चुकी है कि खुली हवा में सांस लेना हमेशा तकरीबन 40 सिगरेट पीने के बराबर है। यह बातें दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरियाने ने मीडिया को दिए एक साक्षात्कार में कही। उन्होंने कहा कि दिल्ली की आबोहवा अभी रहने लायक नहीं है। स्थिति यह है कि दूसरे राज्यों से मेडिकल व नर्सिंग की पढ़ाई करने के लिए एम्स में आए छात्रों को भी खांसी व सांस की बीमारी हो गई है। कुछ समय पहले एक संस्था ने दिल्ली में अध्ययन किया था। तब यह पाया गया था कि लोदी गार्डन में 45 मिनट से एक घंटा तक व्यायाम करने वाले तीन से चार सिगरेट के बराबर प्रदूषित हवा सांस लेते हैं। बहरहाल, यदि पुराने अध्ययन को आधार माने तो अभी दिल्ली में खुली हवा में 10 -12 घंटे रहते हैं तो यह 36 से 40 सिगरेट पीने के बराबर है।

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    2017 में प्रदूषण ने लील ली 12.4 लाख लोगों की जिंदगी

    अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल लांसेट की रिपोट के अनुसार वर्ष 2017 में प्रदूषण देश में करीब 12.4 लाख लोगों की मौत का कारण बना। इसमें से 6.7 लाख लोगों की मौत हवा में पार्टिकुलेट मैटर बढ़ने के कारण हुई। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के कारण, लगातार धरती का तापमान बढ़ने और कुल मिलाकर ग्लोबल वॉर्मिंग के प्रभाव से भारत ही नही दुनियाभर के करोड़ों लोग प्रभावित हो रही है। दो साल पहले एक अध्ययन में सामने आया था कि दिल्ली ही नहीं, एनसीआर के शहरों में रहने वाले लोगों की भी जिंदगी के औसतन 10 साल कम हो रहे हैं।

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