जब होंडा सिटी में बैठे Atiq Ahmed पर दिल्ली पुलिस के जवान ने कनपटी पर तान दी थी पिस्टल

लोगों का डराने वाले अतीक अहमद का सामना एक दिल्ली पुलिस के जवान से हुआ, तब डर के मारे अतीक कांप उठा था।

atiq ahmed case

उत्तर प्रदेश में माफिया से नेता बना अतीक अहमद अब 'अतीत' हो चुका है, लेकिन उसकी माफियागीरी के हजारों ऐसे किस्से हैं, जो आज भी लोगों के अंदर डर बनकर बैठे हुए हैं। लेकिन एक बार दिल्ली में अतीक अहमद के साथ कुछ ऐसा हुआ था, जिसमें लोगों को डराने वाला खुद डर के मारे कांप गया था।

अतीक की मौत के बाद उसकी यातनाओं को झेल चुके पीड़ित परिवार सामने आ रहे हैं। अतीक ने किसी को नहीं बख्शा। माफिया और बाहुबल के जोर पर उसने कमजोर लोगों की प्रोपर्टी पर जमकर कब्जा किया। रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वो 5 में 3 बार विधायक का चुनाव निर्दलीय जीता है। फिर लोकसभा में एंट्री की।

जब अतीक के सामने खड़ी थी 'मौत'

लेकिन अब जिस घटना का यहां जिक्र होगा उसने डराने वाला खुद दहशत से कांप उठा था। साल 2005 में बसपा विधायक राजू पाल की हत्या और कई मामलों में वांटेड चल रहा अतीक अहमद 2007 में दिल्ली अंडरग्राउंड हो गया था, जिसके बाद पहली बार 2008 में अतीक अहमद दिल्ली में पकड़ा गया था। इस दौरान एक जवान ने अतीक पर पिस्टल तान दी थी, जिसके बाद अतीक के पसीने छूट गए।

साल 2008 में अतीक अहमद उस सांसद था और राजूपाल हत्याकांड सहित दर्जनों मामलों में वांटेड चल रहा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब छह महीने तक दिल्ली में रहने के बाद अतीक को 31 जनवरी- 1 फरवरी की दरम्यानी रात को उत्तर पश्चिमी दिल्ली के पीतमपुरा से गिरफ्तार किया गया था।

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    पुलिस के रडार पर थे कुख्यात

    इससे पहले ही दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में एक और माफिया डॉन बृजेश सिंह को गिरफ्तार किया था। ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने यूपी के कई अपराधियों के फोन नंबर सर्विलांस पर रखे थे और उनमें अतीक के लिए काम करने वाला एक शूटर भी था।

    पुलिस को शुरू में पता चला कि अतीक जामा मस्जिद के पास कहीं छुपा हुआ है। हालांकि, पुलिस की दबिश से पहले ही वो जगह बदलता रहता था। शूटर की कॉल ट्रेस के बाद पुलिस टीम ने पीतमपुरा में परवाना रोड पर गालिब अपार्टमेंट से उसे गिरफ्तार किया था।

    31 दिसंबर 2008 की कार्रवाई

    TOI में छपि रिपोर्ट के मुताबिक 31 दिसंबर को अतीक अहमद गालिब अपार्टमेंट में किसी से मिलने आ रहा था, जिसके बाद पुलिस की दस टीमों ने उस पूरे अपार्टमेंट को घेर लिया, जिसके बाद शाम 4 बजे अतीक अहमद बाहर आया और होंडा सिटी कार में सवार हो गया।

    इसके बाद इंस्पेक्टर गोविंद शर्मा, सुभाष वत्स और सब-इंस्पेक्टर विनय त्यागी ने कुछ दूर पीछा करने के बाद अतीक अहमद की कार को अपनी कार से रोक लिया। जैसे ही दिल्ली पुलिस के जवान ने अतीक की कनपटी पर बंदूक रखी, तो पूरी तरह से कांप गया। बताते हैं कि अतीक ने डर के मारे पेशाब तक कर दिया था।

    यूपी पुलिस का मोस्ट वांटेड

    इसके बाद अतीक को स्पेशल सेल के लोधी कॉलोनी ऑफिस लेकर आया गया। उसने तिहाड़ जेल में भी एक रात बिताई थी। दिल्ली में अपनी गिरफ्तारी के वक्त अतीक पर पहले से ही हत्या, अपहरण और जबरन वसूली जैसे जघन्य अपराधों के 46 मामलों में नामजद था, और यूपी पुलिस की मोस्ट वांटेड सूची में था।

    गोली मारकर हत्या

    15 अप्रैल को प्रयागराज में यूपी पुलिस की हिरासत में तीन शूटरों ने अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था। हत्या तब हुई, जब अतीक और अशरफ मेडिकल के लिए ले जा रहे थे, इतने में ही हमलावरों ने फायरिंग कर दी।

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