दिल्ली नगर निगम में AAP को हराने के लिए भाजपा-कांग्रेस ने 'मिलाया हाथ'

आपको सुनने में ये बात भले ही अजीब लगे, लेकिन आम आदमी पार्टी को हराने के लिए भाजपा ने कांग्रेस से हाथ मिला लिया।

नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव में ज्यादा वक्त नहीं बीता है, जब चुनावी रैलियों में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के नेता एक-दूसरे को जमकर कोस रहे थे। लोकसभा चुनाव खत्म हुआ और भारतीय जनता पार्टी ने 303 सीटें जीतकर केंद्र में फिर से मोदी सरकार बना ली। वहीं, कांग्रेस के खाते में केवल 52 सीटें ही गई। लोकसभा चुनाव के बाद अब एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। दरअसल देश की राजधानी दिल्ली में हुए एक चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को अपना समर्थन दे दिया। आपको सुनने में ये बात भले ही अजीब लगे, लेकिन दोनों दलों के बीच यह 'गठबंधन', आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी को हराने के लिए हुआ।

भाजपा ने दिया कांग्रेस को समर्थन, हारी AAP

भाजपा ने दिया कांग्रेस को समर्थन, हारी AAP

मामला उत्तरी दिल्ली नगर निगम जोन के चुनाव का है। यहां गुरुवार को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए हुए चुनाव में दोनों पदों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की। आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों को यहां 1-1 वोट से हार का सामना करना पड़ा। दरअसल कांग्रेस की इस जीत में भाजपा ने बड़ी भूमिका निभाई। उत्तरी दिल्ली नगर निगम जोन में आम आदमी पार्टी के 8 पार्षद हैं, जबकि कांग्रेस के महज 6 ही पार्षद हैं। चुनाव के बाद जब नतीजे घोषित किए गए तो कांग्रेस के दोनों उम्मीदवारों को 9-9 वोट मिले। जाहिर है कि बाकी के तीन वोट भाजपा की तरफ से आए। भाजपा ने अपने वोटों से कांग्रेस को बहुमत के आंकड़े तक पहुंचा दिया। इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी सीमा ताहिरा ने अध्यक्ष और सुलक्षणा ने उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल की।

आप ने कहा, भाजपा की बी टीम है कांग्रेस

आप ने कहा, भाजपा की बी टीम है कांग्रेस

नगर निगम जोन के इस चुनाव में हार मिलने के बाद आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल राय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'नॉर्थ एमसीडी जोन के चुनाव में AAP को हराने के लिए भाजपा और कांग्रेस ने गठबंधन कर लिया।' आम आदमी पार्टी के नेताओं ने कहा कि आज उनकी वो बात सही साबित हुई, जो हम कहते थे कि कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी की बी टीम है। वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि उन्होंने महिला प्रत्याशी होने के कारण कांग्रेस के समर्थन दिया है। भाजपा ने कहा, 'आम आदमी पार्टी के नेता भी उनके पास समर्थन मांगने के लिए आए थे, लेकिन तब तक हमारी पार्टी अपना फैसला ले चुकी थी। हम लोगों ने आपसी संबंधों के आधार पर इस चुनाव में जीत हासिल की है।'

सातों सीटों पर आम आदमी पार्टी को मिली हार

सातों सीटों पर आम आदमी पार्टी को मिली हार

आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सातों सीटों पर आम आदमी पार्टी को करारी हार मिली है। सबसे ज्यादा चर्चित पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार गौतम गंभीर ने कांग्रेस के प्रत्याशी अरविंदर सिंह लवली को 3 लाख से भी ज्यादा वोटों के अंतर से हराकर जीत हासिल की। इस सीट पर आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार आतिशी मार्लेना तीसरे नंबर पर रहीं। चुनाव से पहले पूर्वी दिल्ली के कुछ इलाकों में आतिशी मार्लेना को लेकर कुछ विवादित पर्चे बांटे गए थे, जिन्हें लेकर भाजपा और आप के नेताओं में काफी आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। वहीं, इस चुनाव में उत्तर पश्चिम दिल्ली सीट पर भाजपा के उम्मीदवार हंसराज हंस, चांदनी चौक लोकसभा सीट पर डॉ. हर्षवर्धन, नई दिल्ली लोकसभा सीट पर मीनाक्षी लेखी, दक्षिणी दिल्ली सीट पर रमेश बिधूड़ी और उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट पर दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने जीत हासिल की।

'आखिरी वक्त पर मुस्लिम वोट कांग्रेस को गया'

'आखिरी वक्त पर मुस्लिम वोट कांग्रेस को गया'

लोकसभा चुनाव के दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का वो बयान भी काफी सुर्खियों में रहा था जब उन्होंने मतदान के बाद कहा था कि मुस्लिमों का सारा वोट कांग्रेस को चला गया। दरअसल, अरविंद केजरीवाल ने एक सवाल के जवाब में कहा कि मतदान के 48 घंटे पहले लग रहा था कि आप को सभी सात सीटों पर जीत मिलेगी, लेकिन आखिरी वक्त पर पूरा मुस्लिम वोट कांग्रेस के पाले में शिफ्ट हो गया। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ये सब मतदान के ठीक पहले की रात को हुआ, अब देखते हैं आगे क्या होता है। केजरीवाल ने कहा कि वे पता करने की कोशिश कर रहे हैं कि ऐसा क्या हुआ कि पूरा का पूरा मुस्लिम वोट कांग्रेस को शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम 12-13 फीसदी हैं।

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