नशा व्यापार में दिल्ली, मुंबई सबसे ऊपर

इस तरह नशे के व्यापार के मामले में देश के कुल 53 शहरों में मुंबई और दिल्ली अब तक के अग्रणी शहर हैं। जबकि 2013 के आंकड़े अभी जारी नहीं किए गए हैं। दिल्ली के बाद कानपुर (उत्तर प्रदेश) में नशा व्यापार से संबंधित 551 मामले जबकि अमृतसर (पंजाब) में 457 और कोटा (राजस्थान) में 242 मामले दर्ज किए गए।
इस मामले में महाराष्ट्र के वसइ विरार (2), बिहार के औरंगाबाद (3), झारखंड के धनबाद एवं रांची (4) और गुजरात के राजकोट (5) में अपेक्षाकृत कम प्राथमिकी दर्ज हुए हैं। साल 2012 में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक संब्सटैंस एक्ट, 1985 के तहत 29,247 मामले दर्ज किए गए थे, जो पिछले साल यानी 2011 की तुलना में 13.4 प्रतिशत बढ़ गए।
2011 में यह आंकड़ा 29,048 था। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक पंजाब सबसे ज्यादा नशे की तस्करी और व्यापार करने वाले राज्य के रूप में उभरा है, जहां 2012 में 10,220 मामले दर्ज किए गए थे। वहीं, उत्तर प्रदेश में 6,755 मामले, महाराष्ट्र में 1,903 मामले, तमिलनाडु में 1,402 मामले और राजस्थान में 1,115 मामले दर्ज किए गए थे।
जम्मू एवं कश्मीर में नशे से संबंधित 411 मामले और गुजरात में 68 मामले दर्ज हुए थे। सिक्किम में तीन मामले, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में चार, पुदुचेरी में छह और लक्षद्वीप में 11 मामले दर्ज किए गए थे। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक कुल 13,459 लोगों को गिरफ्तार किया गया जिसमें 216 विदेशी शामिल हैं। इनके पास से 89,519 किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किए गए जिनमें मुख्य रूप से ओपियम, मारफीन, हेरोइन, गांजा, हशीश, कोकीन, एफीड्राइन शामिल हैं।
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा के एक अधिकारी ने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 13 तरह के नशीले पदार्थो की तस्करी की जाती है जिनकी कीमत 1.5 लाख रुपये से लेकर 2.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम होती है।" दिल्ली पुलिस के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि हेरोइन भारत में जम्मू, अमृतसर और राजस्थान की सीमा से लाए जाते हैं वहीं चरस मनाली से, गांजा ओडिशा और झारखंड से लाए जाते हैं।
भारत भर में नशे का व्यापार और तस्करी का नेटवर्क पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और राजस्थान में फैसा हुआ है। हालांकि पुलिस नशे के रैकेट का भंडाफोड़ कर अपराधियों को पकड़ने के प्रयासों में लगी है।












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