Max Hospital Case: पुलिस ने दाखिल किया फाइनल स्टेटस रिपोर्ट
नई दिल्ली। दिल्ली स्थित शालीमार बाग के मैक्स अस्पताल में लापरवाही के मामले में पुलिस ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट फाइल कर दी है। मामले के जांच अधिकारी ने दिल्ली मेडिकल काउंसिल को रिमाइंडर दिया है कि वो अपनी रिपोर्ट दाखिल कर दें। स्टेटस रिपोर्ट में, जांच अधिकारी ने बताया कि अस्पताल के अटेंडेंड इस बात का संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए कि किस परिस्थिति में परिवार को बच्चों का शरीर सौंप दिया गया था। गौरतलब है कि बीते साल 2 दिसंबर को अस्पताल के डॉक्टरों ने एक जिंदा बच्चे को मरा हुआ बता दिया और परिवार वालों को दे दिया। जब पैकेट में बच्चा अचानक पैर चलाने लगा तब परिवार वालों को अस्पताल की लापरवाही का पता चला था।

ये है मामला
मैक्स अस्पताल में गुरुवार को एक महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। डॉक्टरों ने जन्म के बाद एक बच्चे को मृत घोषित कर दिया। इसके कुछ देर बाद ही उन्होंने दूसरे बच्चे को भी मरा हुआ बता दिया। ये खबर जैसे परिवार वालों पर कहर बनकर टूटी। दोनों शवों को पैकेट में बंद कर सौंपा गया था। जब परिवार वाले शवों को लेकर लौट रहे थे तभी एक पैकेट में से बच्चा पैर हिलाने लगा। बच्चे को जिंदा सोच घरवालों ने उसे फौरन नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया।

तब पुलिस को दी गई थी जानकारी
अस्पताल में डॉक्टरों ने बताया कि बच्चा जिंदा है और उसकी सांसें चल रही हैं। घरवालों ने उम्मीदों से दूसरे बच्चे के बारे में भी पूछा पर डॉक्टरों ने उसे मृत ही बताया। जिंदा बच्चे को मरा हुआ बताने पर घरवालों ने मैक्स अस्पताल के खिलाफ शालीमार बाग पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराई थी । घरवालों ने पहले तो अस्पताल में जमकर हंगामा काटा फिर पुलिस को अस्पताल की लापरवाही की जानकारी दी थी।

लाइसेंस हुआ लाइसेंस
वहीं जीवित नवजात बच्चे को मृत बता देने के मामले में फंसे मैक्स अस्पताल का लाइसेंस कैंसिल कर दिया गया था। हालांकि इसके बाद दिल्ली मेडिकल ऐसोसिएशन ही उसके पक्ष में आ गया था। मैक्स अस्पताल के अन्य डॉक्टरों का कहना है कि सारे सरकारी अस्पतालों के लाइसेंस भी रद्द होने चाहिए क्योंकि वहां कोई सुविधाएं नही हैं।

दूसरे बच्चे की भी हो गई थी मौत
बता दें कि जीवित नवजात को मृत बताने के मामले में दिल्ली सरकार ने एक्शन लेते हुए मैक्स अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दिया था जिसके बाद दिल्ली सरकार को खूब वाहवाही भी मिली थी। वहीं दूसरा बच्चा जो जिंदा बचा था उसकी भी इलाज के दौरान मौत हो गई थी।












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