गर्मियों में केजरीवाल की जिद के आगे बेहाल होंगे दिल्लीवासी
नई दिल्ली। एनटीपीसी के चेयरमैन अरूप रॉय चौधरी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बीच का टकराव दिल्लीवासियों के लिए इस बार भीषण गर्मी में काफी मुश्किलें खड़ी कर सकता है। माना जा रहा है कि दिल्ली में जिस तरह से पारा रोज बढ़ता जा रहा है उस बीच बिजली आपूर्ती में कटौती दिल्लीवासियों के पसीने बहा सकती है।

एनटीपीसी की केजरीवाल को खुली चेतावनी
वहीं दिल्ली सरकार बिजली के लिए एनटीपीसी से अपनी निर्भरता को कम करने के लिए खुद बिजली के उत्पादन की योजना बना रही है। वहीं एनटीपीसी का कहना है कि हमारे पास कई सक्षम ग्राहक हैं जो हमसे बिजली लेने को तैयार हैं। एनटीपीसी के चेयरमैन अरूप रॉय का कहना है कि दादरी, झज्जर और बदरबुर को दी जाने वाली बिजली को हम किसी और को बेच सकते हैं।
दिल्ली की मांग की वजह से किया बड़ा निवेश
अरूप रॉय का कहना है कि दिल्ली सरकार हमसे ज्यादा बिजली की मांग कर रही थी जिसके चलते एनटीपीसी ने दिल्ली बड़ा निवेश किया था। लेकिन अगर आप सरकार इन पॉवर प्लांट से बिजली नहीं लेना चाहती है तो हमारे पास और भी ग्राहकर हैं जिन्हें हम यह बिजली देंगे।
हरियाणा के झज्जर पॉवर प्लांट में उत्पादित होने वाली ज्यादातर बिजली की सप्लाई आंध्र प्रदेश की बिजली इकाईक को दी जाती है। अरूप रॉय ने कहा कि भारतीय रेल दादरी थर्मल प्लांट की पूरी बिजली हमसे खरीदने को तैयार है।
एक बार अगर बिजली आपूर्ती बंद हुई तो दोबारा देने में असमर्थ
वहीं चौधरी ने आप सरकार को चेताया है कि अगर एक बार इन पॉवर प्लांट की बिजली को किसी और उपभोक्ता को सप्लाई करने के मसौदे पर हस्ताक्षर हो जाता है तो दिल्ली में आने वाली गर्मियों में बिजली की मांग बढ़ने पर हम दिल्ली को बिजली ने देने में बिल्कुल भी समर्थ नहीं होंगे।
मौजूदा हाल में दिल्ली की अधिकतम बिजली की मांग 4600 मेगावाट है, ऐसे में इस बार दिल्ली में गर्मियों के मौसम में एनटीपीसी लोगों को मुश्किल में नहीं डालना चाहती है। चौधरी ने कहा कि ऐसे में अगर एक बार बिजली दूसरे उपभोक्ताओं को दे दी गयी तो नया ग्राहक अपनी बिजली को किसी और से साझा करने की अनुमति बिल्कुल नहीं देगा और हम ऐसा करने के लिए बाध्य होंगे।
केजरीवाल का रवैया बन सकता है दिल्लीवालों की मुसीबत
एनटीपीसी ने यह बयान इसलिए दिया है क्योंकि हाल ही में केजरीवाल ने दिल्ली में खुद से बिजली के उत्पादन की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि एनटीपीसी से मिलने वाली बिजली कापी महंगी और हम एनटीपीसी से अपनी निर्भरता को कम करना चाहते हैं।
एनटीपीसी केजरीवाल की मजबूरी है
दिल्ली में गर्मियों के मौसम में 6500 मेगावॉट बिजली की मांग होती है। लेकिन दिल्ली में कुल 1100 मेगावॉट बिजली का ही उत्पादन होता है। जबकि बाकी की 4500-5500 मेगावॉट बिजली को अन्य राज्यों और केंद्रीय बिजली कंपनियों से ही खरीदा जाता है। वहीं वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि एनटीपीसी से विवाद के बाद भी दिल्ली सरकार के पास एनटीपीसी से बिजली खरीदने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।
दिल्ली की मदद करने में कोई राज्य सक्षम नहीं
एनटीपीसी दिल्ली को 3000 मेगावॉट बिजली की आपूर्ती करता है जो कोई और राज्य दिल्ली को नहीं कर सकती है। सिर्फ हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड ही अपने प्रदेश की बिजली आपूर्ती खुद से पूरी करने में सक्षम हैं। लेकिन इन राज्यों के पास अन्य राज्यों को देने के लिए बिजली नहीं है। जबकि अन्य राज्यों को केंद्र सरकार पर बिजली के लिए निर्भर होना पड़ता है।












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