भारत में पहली बार ड्रोन से हुआ ब्लड पैकेट की डिलीवरी का सफल ट्रायल, अब कम समय में जरुरतमंदो तक पहुंच सकेगा
भारत में अब ड्रोन के जरिए दवाइयों के साथ-साथ ब्लड की डिलिवरी भी हो सकेगी। दिल्ली में आज इसका सफल ट्रायल किया गया है।

Blood Bags Delivered By Drones: परिवहन के पारंपारिक तरीकों को दरकिनार कर ड्रोन के जरिए अब ब्लड की डिलिवरी संभव हो सकेगी। जी हां..भारत में पहली बार ड्रोन के जरिए ब्लड की डिलीवरी करने का सफल ट्रायल किया गया है। ड्रोन की मदद से भारत में अब ब्लड को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा जा सकेगा।
स्वास्थ्य सेवा में आपातकालीन समय के दौरान ड्रोन की मदद से न केवल टीके और दवाएं एक स्थान से दूसरे स्थान भेजी जा सकेंगी। बल्कि, कम समय में जरुरतमंदो तक दवाइयां और ब्लड पहुंचाया जा सकेगा। वहीं, इस सुविधा के बाद भीषण जाम और ट्रैफिक से भी राहत मिलेगी।
बता दें कि एक्सीडेंट समेत दूसरे अन्य हादसों में मरीजों के इलाज के लिए ब्लड की जरूरत पड़ने पर कई बार सही समय पर बल्ड नहीं मिल पाता। जिससे मरीज की जान चली जाती है। लेकिन, शायद अब ऐसा नहीं होगा।
ड्रोन से डिलिवरी के बारे में आईसीएमआर के डायरेक्टर जनरल डॉ. राजीव बहल ने विस्तार से जानकारी दी। डॉ. राजीव बहल ने जानकारी देते हुए बताया कि 'आई-ड्रोन' का उपयोग पहली बार कोविड-19 महामारी के दौरान आईसीएमआर द्वारा अगम्य क्षेत्रों में टीकों के वितरण के लिए किया गया था।
उन्होंने कहा कि आज, हम ब्लड और ब्लड से संबंधित प्रोडक्ट का ट्रांसपोर्ट कर रहे हैं, जिसे कम तापमान पर रखा जाता है। बताया कि इस प्रयोग के बाद, हमने पाया कि न केवल हम तापमान को बनाए रख सकते हैं, बल्कि परिवहन किए गए उत्पादों को भी कोई नुकसान नहीं हुआ।
हमने एंबुलेंस के माध्यम से एक और नमूना भेजा और उसके बाद ड्रोन के जरिए भेजे गए सैंपल से इसका मिलान किया जाएगा। डॉ. बहल ने कहा कि यदि दोनों तरीकों का यूज के बाद सैंपल में कोई अंतर नहीं होगा तो इस ड्रोन का उपयोग पूरे भारत में किया जाएगा।
कोरोना काल के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने पहली बार आईसीएमआर के वैकसीन डिलिवरी मॉडल को मंजूरी दी थी। आईसीएमआर ने आईआईटी कानपुर के साथ मिलकर आई-ड्रोन डेवलप किया था।












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