'भारत में कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज क्यों नहीं दी जा रही?'

दिल्ली हाईकोर्ट ने भी कोरोना वायरस वैक्सीन की बूस्टर डोज दिए जाने पर केंद्र सरकार को अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया।

नई दिल्ली, 26 नवंबर: कोरोना वायरस के मामलों में आ रहे उतार-चढ़ाव के बीच देश में वैक्सीन की बूस्टर डोज को लेकर मांग उठने लगी है। हाल ही में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों पर बुलाई समीक्षा बैठक में कहा कि अब देश को वैक्सीन की बूस्टर डोज की जरूरत है और इस संबंध में वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखेंगे। इस बीच गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने भी कोरोना वायरस वैक्सीन की बूस्टर डोज दिए जाने पर केंद्र सरकार को अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया।

'अमेरिका-यूरोप में बूस्टर डोज, भारत में क्यों नहीं'

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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, 'कोरोना वायरस वैक्सीन की बूस्टर डोज देने का फैसला अर्थशास्त्र पर आधारित नहीं होना चाहिए। कमजोर इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए जब अमेरिका और यूरोप के कई देश बूस्टर डोज की इजाजत दे रहे हैं, तो भारत में बूस्टर डोज क्यों नहीं उपलब्ध कराई जा रही। अगर देश में कोरोना वायरस के खिलाफ बूस्टर डोज की जरूरत है तो केंद्र सरकार इस संबंध में एक पूरी टाइम-लाइन इस कोर्ट में जमा करे।'

वैक्सीन की बूस्टर डोज पर एक्सपर्ट की क्या है राय

वैक्सीन की बूस्टर डोज पर एक्सपर्ट की क्या है राय

आपको बता दें कि दिल्ली में कोरोना वायरस के हालात के मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट में जस्टिस विपिन सांघी और जसमीत सिंह की बेंच ने कोरोना वायरस वैक्सीन बूस्टर डोज की जरूरत और इसके असर को लेकर चल रही परस्पर विरोधी मीडिया रिपोर्ट और मेडिकल ऑपिनियन पर संज्ञान लेते हुए केंद्र को यह निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह देखा कि भारत में एक्सपर्ट्स का मानना है कि अभी तक वैक्सीन की बूस्टर डोज दिए जाने की जरूरत का कोई मेडिकल साक्ष्य नहीं है।

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    'अगर हालात बिगड़े तो टीकाकरण का फायदा खो देंगे'

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    दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले पर कहा, 'इस बात में कोई शक नहीं कि वैक्सीन की बूस्टर डोज देने का प्रस्ताव एक खर्चीला प्रस्ताव है और सरकार फिलहाल लोगों को फ्री में वैक्सीन उपलब्ध करा रही है। बहुत सारे लोग ऐसे हैं जिन्हें वैक्सीन के लिए कोई पैसा नहीं देना पड़ रहा, लेकिन फिर भी हम कहेंगे कि बूस्टर डोज का फैसला अर्थशास्त्र पर आधारित नहीं होना चाहिए। शायद यही वजह है कि सरकार अभी वैक्सीन की बूस्टर डोज पर विचार नहीं कर रही, लेकिन फिर भी हमें उस हालात में नहीं पड़ना चाहिए, जिससे लगे कि हम रूढ़िवादी हैं और कोरोना वायरस की दूसरी लहर जैसी स्थिति फिर से पैदा हो। अगर ऐसा हुआ तो जो टीकाकरण इस समय देश में चल रहा है, हम वास्तविक तौर पर उसका लाभ खो देंगे।'

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