जब वैक्सीन ही नहीं है, तो फोन में क्यों बजा रहे हैं कोरोना कॉलर ट्यून, दिल्ली हाईकोर्ट ने पूछा
जब वैक्सीन ही नहीं है, तो फोन में क्यों बजा रहे हैं कोरोना कॉलर ट्यून, दिल्ली हाईकोर्ट ने पूछा
नई दिल्ली, 14 मई: भारत में एक मई से जब से 18+ वालों को वैक्सीनेट करने का अभियान चल रहा है, कोरोना वायरस टीकाकरण की रफ्तार धीमी हो गई है। देश के लगभग हर राज्यों की शिकायत है कि उनके यहां वैक्सीन के डोज नहीं है। इस बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने कोरोना कॉलर ट्यून पर नाराजगी जताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार (13 मई) को कहा कि हमें हैरानी है कि केंद्र सरकार ने कॉलर ट्यून का परेशान करने वाला संदेश को अभी तक क्यों नहीं बदला है, जिसमें बार-बार लोगों को टीका लगवाने के लिए कहा जाता है। जबिक असल में वैक्सीन है ही नहीं। जस्टिस विपिन सांघी और रेखा पल्ली की पीठ ने केंद्र के वकीलों से कहा, ''फोन करने पर बार-बार परेशान करने वाली ट्यून सुनाई पड़ती है कि वैक्सीन लगवाइए, कौन लगाएगा वैक्सीन, जब ये है ही नहीं तो।''

जस्टिस विपिन सांघी और रेखा पल्ली की पीठ ने कहा, "आप असल में लोगों को वैक्सीव नहीं लगा रहे हैं, लेकिन आप अभी भी कॉलर ट्यून में कहते हैं कि वैक्सीन लगवाइए। कहां से लगवाएं वैक्सीन, जब कहीं भी वैक्सीन है नहीं तो। इस संदेश का क्या मतलब है।''
क्या आप इस कॉलर ट्यून को 10 सालों तक चलाएंगे: दिल्ली हाई कोर्ट ने पूछा
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा, ''हमें नहीं पता कि ये सब कितना लंबा चलने वाला है। वो भी तब जब आपके पास वैक्सीन ही नहीं है। इस तरह के मैसेज का क्या मतलब है, बताइए, सरकार को और भी मैसेज बनाने चाहिए। ये नहीं कि एक ही मैसेज बनाया और किसी भी परिस्थिति में उसी को चलाते रहें। ऐसा लग रहा है आप इस मैसेज को 10 सालों तक चलाएंगे। ठीक वैसे ही जैसे जब एक एक टेप खराब नहीं हो जाता, हमे उसे चलाना नहीं छोड़ते हैं।''
कोर्ट ने कहा, ''जब भी कोई फोन करता है तो आप उस फोन पर एक चिड़चिड़ा संदेश चला रहे होते हैं, कि लोगों को टीकाकरण करवाना चाहिए, वो भी तक जब आपके (केंद्र) पास पर्याप्त टीके नहीं हैं। आपको वैक्सीन सभी को लगाना चाहिए। अगर आप पैसे लेने जा रहे हैं तो भी दें।''
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कोरोना अभियान के प्रचार-प्रसार में अमिताभ बच्चन जैसी हस्तियों को शामिल कीजिए
दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को सलाह देते हुए कहा है कि जैसा पिछले साल मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और हाथ धोने को लेकर ऑडियो-विजुअल प्रचार-प्रचार हुआ था, ठीक उसी तरह इस साल भी ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, दवाओं आदि के इस्तेमाल पर ऑडियो-विजुअल प्रसार-प्रचार होना चाहिए। अदालत ने कहा कि इसके लिए टीवी एंकर्स और प्रोड्यूसर की मदद से छोटे-छोटे ऑडियो-वीडियो मैसेज तैयार करने चाहिए। ऑक्सीजन सिलेंडरों के उपयोग या टीकाकरण के बारे में जागरूक करने के लिए लघु कार्यक्रम बनाए जाने चाहिए, जिसे सभी चैनलों पर प्रसारित किया जा सकता है।
कुछ वकीलों ने सुझाव दिया कि अमिताभ बच्चन जैसी हस्तियों को भी कोरोना अभियान में शामिल होने के लिए कहा जा सकता है। दिल्ली हाई कोर्ट भी इस पर सहमत हुआ है कि अमिताभ बच्चन जैसी हस्तियों को प्रचार-प्रसार कराया जाया। कोर्ट ने इसके लिए 18 मई तक सरकार से रिपोर्ट मांगी है। साथ ही कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यह सब जल्द ही किया जाना चाहिए।
सांसद महुआ मोइत्रा बोलीं- धन्यवाद HC वही सोचने के लिए जो हम सोच रहे हैं
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने दिल्ली हाई कोर्ट के कमेंट पर प्रतिक्रिया दी है। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने ट्वीट कर कोर्ट के कमेंट को कोट करते हुए लिखा, ''जब भी कोई फोन करता है, तो आप फोन पर एक चिड़चिड़ाहट पैदा करने वाले संदेश चला रहे होते हैं, कि लोगों को टीकाकरण करवाना चाहिए, जब आपके (केंद्र) पास पर्याप्त टीके ही नहीं तो लोग कैसे करवाएंगे आपको इसे सभी को देना चाहिए।'' शुक्रिया दिल्ली हाई कोर्ट वही सोचने के लिए जो हम सोट रहे हैं।''












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