'पानी पीने पर मारते थे पत्थर', मोदी सरकार ने लीबिया से मुक्त करवाए 4 मजदूर, सुनाई जुल्म की दास्तां
लीबिया में चार भारतीय नागरिकों को बंदी बनाकर रखा गया था। साथ ही उनसे जबरन मजदूरी करवाई जा रही थी। जब ये खबर भारत सरकार को लगी, तो तुरंत वहां मौजूद भारतीय दूतावास सक्रिय हुआ। साथ ही उन सभी को मुक्त करवाया।
वहीं सभी मजदूरों को तुरंत भारत लाने की व्यवस्था की गई। जिसके तहत शुक्रवार को वो सभी दिल्ली पहुंचे। वहां पर उनका स्वागत किया गया। साथ ही सभी ने भारत सरकार को धन्यवाद कहा। उन्होंने भावुक होकर अपने ऊपर हुए जुल्म के बारे में भी बताया।

न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए लीबिया से लौटे एक मजदूर ने कहा कि सबसे पहले मैं विदेश मंत्रालय और विदेश मंत्री एस जयशंकर को धन्यवाद देना चाहता हूं। हम लीबिया में झेले गए दर्द और कठिनाइयों को नहीं भूल सकते। हमको माफिया को बेच दिया गया था। उन्होंने हमें खाने के लिए कुछ भी नहीं दिया। वो हमारे सामने पानी की बोतल रखते, लेकिन जब तक काम पूरा ना हो जाए, पानी पीने की इजाजत नहीं थी। अगर कोई पानी पीने जाता तो उसको पत्थर से मारा जाता था।
वहीं एक अन्य मजदूर मनप्रीत सिंह ने बताया कि वो 14 जनवरी को लीबिया गए थे। दो महीने तक तो वो परिवार के संपर्क में रहे, लेकिन बाद में उनको माफिया को बेच दिया गया। फिर उन्होंने आगे दूसरे को बेच दिया। उन्होंने भारत सरकार से मदद मांगी थी, जिस पर तुरंत उनकी मुक्त करवाया गया।
सपने दिखाकर फंसाते हैं जाल में
विशेषज्ञों के मुताबिक ये कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई लोग माफिया की दादागीरी का शिकार हो चुके हैं। सबसे पहले भारत में मौजूद फर्जी एजेंट मजबूर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। इसके बाद उनको लीबिया में नौकरी और अच्छी सुविधाओं को सपना दिखाया जाता है।
जब कोई उनके जाल में फंस जाता है, तो उसको लीबिया में भेजकर मजदूरी करवाई जाती है। इसके अलावा उनको माफिया को बेच दिया जाता है, जो उन पर जुल्म करते हैं। उनको ना तो रहने की सुविधा मिलती है और ना ही ढंग का खाना। उनके फोन भी जब्त कर लिए जाते हैं, ऐसे में वो किसी से संपर्क नहीं कर सकते।












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