दिल्ली चुनाव: अब 2024 में केजरीवाल से होगा मोदी का मुकाबला, AAP समर्थकों ने लहराए पोस्टर्स
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में एक बार फिर से आम आदमी पार्टी (आप) के अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री की पारी खेलने को तैयार हैं। मंगलवार को आए नतीजों के बाद पार्टी तीसरी बार विजय हासिल करने में सफल हुई है। समर्थकों में खासा उत्साह है और वे कह रहे हैं कि अब साल 2024 में जो लोकसभा चुनाव होने वाले हैं उसमें केजरीवाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टक्कर देंगे। इस तरह के संदेश वाले पोस्टरों के साथ समर्थकों को जीत का जश्न मनाते हुए मंगलवार को देखा गया।
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समर्थकों ने लहराए पोस्टर
मंगलवार की सुबह आप के दिल्ली ऑफिस के बाहर कुछ समर्थक पहुंचे थे। यहां पर उनके हाथ में एक पोस्टर था और इस पर अंग्रेजी में लिखा था, '2024: केजरीवाल वर्सेज मोदी'। साल 2024 में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। आप के एक समर्थक के हाथ में इस बैनर ने एक अहम संदेश बीजेपी को देने का काम किया है। दिल्ली में हुए विधानसभा चुनावों को भी मोदी और केजरीवाल के बीच मुकाबले के तौर पर देखा गया था। स्थानीय मुद्दों और राष्ट्रीय हित के मुद्दों के नाम पर इस चुनाव को लड़ा गया था।

2014 में वाराणसी से केजरीवाल ने लड़ा चुनाव
दिल्ली विधानसभा में कुल 70 सीटे हैं लेकिन यह पहली बार था कि जब प्रधानमंत्री समेत बीजेपी के राष्ट्रीय स्तर के बड़े नेताओं को प्रचार करते हुए देखा गया था। केजरीवाल साल 2013 से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बड़े आलोचक रहे हैं। इस वर्ष भी दिल्ली में विधानसभा चुनाव हुए थे और आप पार्टी की वजह से बीजेपी दिल्ली में सरकार नहीं बना पाई थी। साल 2014 में केजरीवाल ने पीएम मोदी को उस समय चुनौती दी जब वह वाराणसी से ही लोकसभा चुनावों में किस्मत आजमाने पहुंचे। वाराणसी से पीएम मोदी भी चुनाव लड़ रहे थे।

2015 में पार्टी को मिली बड़ी जीत
साल 2015 में दिल्ली में हुए विधानसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी और केजरीवाल ने एक-दूसरे पर जमकर हमले बोले थे। केजरवाली ने हालांकि दिल्ली में बतौर चीफ मिनिस्टर वापसी की। आम आदमी पार्टी को उन चुनावों में 70 में 67 सीटें हासिल हुई थीं और तीन सीटें बीजेपी को मिली थी। आप का वोट भी 54 प्रतिशत दर्ज किया गया था।

साल 2019 के चुनावों में बीजेपी को मिली चुनौती
साल 2019 में पीएम मोदी ने दूसरा कार्यकाल भी अपने नाम किया लेकिन दिल्ली में आम आदमी ने बीजेपी को बड़ी चुनौती पेश की थी। पार्टी को 18 प्रतिशत वोट ही मिले थे मगर सात लोकसभा सीटों में पांच पर आम आदमी पार्टी तीसरे नंबर पर रही। तीन सीटों पर पार्टी की जमानत भी जब्त हो गई थी। वहीं इससे उलट 57 प्रतिशत वोटों के साथ बीजेपी ने सभी सातों सीटों पर जीत दर्ज की थी।












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