दिल्ली धर्म संसद: पुलिस की रिपोर्ट से सुप्रीम कोर्ट असंतुष्ट, फिर से मांगा हलफनामा
नई दिल्ली, 22 अप्रैल: राजधानी के धर्म संसद में दिए गए भाषण का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, जिसमें कई लोगों पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगा। इस मामले में जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने हलफनामा दायर कर कहा कि धर्म संसद में किसी तरह की अभद्र भाषा नहीं इस्तेमाल की गई। अब इस पर सर्वोच्च अदालत ने असंतोष जाहिर किया है। साथ ही जांच टीम को बेहतर हलफनामा दायर करने को कहा।
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दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के सामने ये स्वीकार किया कि उसे अपने हलफनामे पर विचार करने की जरूरत है। जिसमें कहा गया कि 19 दिसंबर को राजधानी में आयोजित 'धर्म संसद' में कोई अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं हुआ था। उसने कोर्ट को आश्वासन दिया कि अब उसकी ओर से बेहतर हलफनामा दायर किया जाएगा।
आपको बता दें कि इस कार्यक्रम में सुदर्शन टीवी के मुख्य संपादक सुरेश चव्हाण ने लोगों से शपथ लेने का आग्रह किया था, जिसमें कहा गया कि हम हिंदू राष्ट्र के लिए लड़ेंगे, मारेंगे और जरुरत पड़ी तो मारेंगे। इस कार्यक्रम को हिंदू युवा वाहिनी ने आयोजित किया था। उसके भी कई वक्ता इसमें शामिल हुए थे। इस हलफनामे पर वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सवाल उठाए और कहा था कि दिल्ली पुलिस का मकसद समुदाय की नैतिकता को बचाना था।
इस पर जस्टिस एएम खानविलकर ने पूछा कि ये हलफनामा पुलिस उपायुक्त ने दायर किया है। ये सब इंस्पेक्टर रैंक के जांच अधिकारी का स्टैंड है या डीसीपी का। उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली पुलिस का नया हलफनामा 4 मई तक दाखिल किया जाना चाहिए।
ये थी दिल्ली पुलिस की दलील
दिल्ली पुलिस ने कहा कि धर्म संसद में मुसलमानों के खिलाफ उकसावे की कोई बात नहीं कही गई थी। वहां पर सिर्फ धर्म की बारीकियों की चर्चा की गई, ऐसे में देखा जाए तो किसी भी समुदाय के खिलाफ हेट स्पीच नहीं दी गई थी।












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