I-PAC के डायरेक्टर विनेश चंदेल की जमानत पर ED का U-टर्न! कोर्ट ने रिहाई के दिए आदेश

राजनीतिक गलियारों और चुनावी रणनीतियों के केंद्र में रहने वाली संस्था I-PAC (Indian Political Action Committee) के डायरेक्टर विनेश चंदेल को दिल्ली की एक कोर्ट ने नियमित जमानत दे दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तार किए जाने के करीब दो सप्ताह बाद चंदेल को यह राहत मिली है।

गौर करने वाली बात यह रही कि जांच एजेंसी ED ने इस जमानत याचिका का विरोध नहीं किया, जिसके बाद अदालत ने रिहाई के आदेश जारी किए। आइए जानते हैं अदालत में किन दलीलों के आधार पर यह फैसला आया है...

पटियाला हाउस कोर्ट के एडिशनल सेशंस जज अमित बंसल ने गुरुवार को इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विनेश चंदेल की जमानत का विरोध नहीं किया है, इसलिए PMLA की धारा 45 के तहत आने वाली 'कड़ी शर्तें' (Twin Conditions) इस मामले में स्वतः ही शिथिल हो जाती हैं। बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि चंदेल जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं, जिसे एजेंसी ने भी स्वीकार किया।

Patiala House Court

क्या है पूरा मामला?

Bar and Bench की रिपोर्ट के मुताबिक, विनेश चंदेल, जो PAC कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर और 33% शेयरहोल्डर हैं, को 13 अप्रैल को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। यह मामला दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक FIR से शुरू हुआ था, जिसके बाद ED ने PMLA के तहत जांच शुरू की।

ED के गंभीर आरोप: 50 करोड़ की हेराफेरी

जांच एजेंसी ने I-PAC और उसकी सहयोगी कंपनियों पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं:

  • वित्तीय अनियमितता (Financial Irregularity): एजेंसी का दावा है कि कंपनी को भारी मात्रा में 'अनअकाउंटेड' (बेहिसाबी) फंड प्राप्त हुआ है।
  • फर्जी इनवॉइस (Fake Invoice): बिना किसी ठोस व्यावसायिक आधार के असुरक्षित ऋण लेने और फर्जी बिल जारी करने के आरोप हैं।
  • हवाला ट्रांजेक्शन (Hawala Transaction): ED का आरोप है कि फंड की आवाजाही के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाला चैनलों का इस्तेमाल किया गया।
  • अपराध की कमाई (Proceeds of crime): एजेंसी के मुताबिक अब तक की जांच में लगभग 50 करोड़ रुपये की हेराफेरी का पता चला है।

यह मामला तब और भी चर्चा में आ गया था जब ED ने कोलकाता के साल्ट लेक स्थित I-PAC कार्यालय पर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी, जिससे यह कानूनी मामला एक बड़े राजनीतिक विवाद में तब्दील हो गया था। फिलहाल, नियमित जमानत मिलने से विनेश चंदेल को फौरी तौर पर बड़ी राहत मिल गई है, हालांकि मामले की जांच जारी रहेगी।

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