सत्यम-लिबर्टी सिनेमा बम ब्लास्ट केस में इकलौता आरोपी हुआ बरी, कोर्ट ने कहा- हमें पर्याप्त सबूत नहीं मिले
नई दिल्ली, मार्च 27। साल 2005 के सत्यम और लिबर्टी सिनेमा बम ब्लास्ट मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने एक आरोपी को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि आरोपी को सबूतों के अभाव में बरी किया गया है। बता दें कि आरोपी त्रिलोचन सिंह पर आतंकी संगठन बब्बर खालसा का सदस्य होने का आरोप लगा था। कोर्ट ने यह कहते हुए आरोपी को बरी कर दिया कि पुलिस त्रिलोचन सिंह के खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाई, इसलिए आरोपी बरी होने का हकदार है।

एडिशनल सेशन कोर्ट के जज धर्मेंद्र ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आरोपी त्रिलोचन सिंह को धारा 18 (साजिश के लिए सजा) और 20 (आतंकवादी गिरोह या संगठन का सदस्य होने की सजा) के तहत दंडनीय अपराध के लिए उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया गया है। जज ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने आरोपी की टेलीफोन पर बातचीत के दौरान 'भूखंड', 'खेत', 'फसल', 'पानी' इत्यादि जैसे आम शब्दों और उनके अर्थ के बीच संबंध बताया है, लेकिन ''संदेह एवं ईर्ष्यालु रवैये के कारण किसी उत्साही पुलिस अधिकारी द्वारा सरल एवं साधारण शब्दों को गलत समझने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
जज ने कहा कि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मेरा विचार यह है कि अभियोजन के पक्ष में संदेह नजर आता है और रिकॉर्ड में मौजूद सबूत इतने ठोस नहीं है कि वे आरोपी त्रिलोचन सिंह को यूएपीए और धारा 20 (आतंकवादी संगठन की सदस्यता) के तहत दंडनीय अपराध का जिम्मेदार ठहरा पाएं।
2007 में हुई थी गिरफ्तारी
आपको बता दें कि 2005 में सत्यम और लिबर्टी सिनेमा में हुए ब्लास्ट के मामले में दिल्ली पुलिस ने त्रिलोचन सिंह को 2007 में हरियाणा के पंचकूला स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया था। सिंह पर आरोप थे कि पंजाब में आतंकवाद को पुनर्जीवित करने के लिए वो बब्बर खालसा संगठन के लिए काम कर रहा था। पुलिस का दावा था कि त्रिलोचन बब्बर खालसा के सदस्य बलजीत सिंह के संपर्क में था, जिसने एक सिख धार्मिक नेता, बाबा प्यारा सिंह पनिहारी वाला और कुछ अन्य को मारने और पंजाब में आतंकवाद को पुनर्जीवित करने की योजना बनाई थी।












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