सोनिया के लिये लवली नहीं रहे दिल्ली के लवली

नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। दिल्ली में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा होने वाली है, पर लगता है कि कांग्रेस अपने को सुधारने के लिए तैयार नहीं है। लोकसभा चुनावों में सातों सीटें दिल्ली में हारने के बाद भी पार्टी के नेता एक-दूसरे से लड़ रहे हैं। एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। यूं कहिये कि कांग्रेसियों के लिये अब उनके अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली, लवली यानी प्यारे नहीं रहे।

Delhi congress leaders not happy with Arvinder Singh Lovely

पिछले दिनों सीलमपुर के विधायक मतीन अहमद और ओखला के विधायक मोहम्मद आसिफ ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात करके दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान अरविंदर सिंह लवली की शिकायतें की। इन्होंने कहा कि लवली पार्टी में जान फूंकने में नाकाम रहे हुए।

सज्जन-टाइटलर को लाओ

सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस के दोनों विधायकों ने सज्जन कुमार और जगदीश टाइटलर को पार्टी में फिर से कोई रोल देन की भी वकालत की। हालांकि इसमें कोई शक नहीं है कि लवली दिल्ली में बिजली,पानी की कमी और बढ़ती महंगी के खिलाफ लगातार धऱने -प्रदर्शन करते रहे हैं। इसलिए यह बात तो नहीं मानी जा सकती कि वे निकम्मे नेता हैं।

सूत्रों का कहना है कि मतीन अहमद और मोहम्मद आसिफ के सोनिया गांधी से मिलने के बावजूद लवली परेशान नहीं है। उन्होंने अपने कुछ करीबियों को कहा कि कांग्रेसबहुत बड़ी पार्टी है। यहां पर मतभेद होना तय है। पर हम अगला विधान सभ चुनाव में अपनी ताकत दिखा देंगे।

हालांकि जानकार मानते हैं कि लवली भले ही कुछ कहें या दावा करें, पर सच्चाई यह है कि विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले कांग्रेस के भीतर यह कलह पार्टी के लिए शुभ संकेत नहीं है। इससे पार्टी को हानि हो सकती है।

सनद रहे कि पिछले दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा में मात्र 8 सीटें मिलीं थीं।

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