दिल्ली में 'पुराने दिन' लौटाने की तैयारियों में जुटी कांग्रेस, AAP को टक्कर देने की बारी?
दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली के जिम्मेदारी संभालते ही पार्टी ऐक्शन में आ गई है। लवली ने बुधवार को कहा है कि कांग्रेस संगठनात्मक बदलावों के साथ न सिर्फ खुद को फिर से सक्रिय करेगी, बल्कि जो नेता पार्टी छोड़कर गए हैं, उन्हें वापस लाने की भी कोशिश करेगी।
दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री लवली ने कहा है, 'हम राष्ट्रीय राजधानी में पार्टी को फिर से खड़ा करने और शहर के हर एक कांग्रेस नेता और कार्यकर्ताओं की भावना को बढ़ावा देने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगे। इंतजार कीजिए और देखिए कि पहले कांग्रेस छोड़कर जाने वाले कितने नेता वापस लौटते हैं।' कांग्रेस ने हाल ही में उन्हें प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया है।

AAP के लिए चुनौती खड़ी करने की कोशिश में कांग्रेस?
कांग्रेस की यह सक्रियता दिल्ली में सत्ताधारी और इंडिया ब्लॉक में पार्टी की सहयोगी आम आदमी पार्टी के लिए दो तरह से चुनौती खड़ी कर सकती है। क्योंकि, लवली जिन नेताओं को पार्टी में वापस लाने की बात कह रहे हैं, उनमें से अधितर बड़े नाम आम आदमी पार्टी से ही जुड़े हैं। वहीं पार्टी ने दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों के लिए भी संगठन के स्तर पर धरातल पर भी खुद को सक्रिय हो जाने की बात स्पष्ट कर दी है।
जैसे कांग्रेस के पूर्व सांसद महाबल मिश्रा 2022 में दिल्ली नगर निगम चुनावों से पहले ही आम आदमा पार्टी में शामिल हो गए थे। इसी तरह से चांदनी चौक से चार बार के कांग्रेस के विधायक रहे प्रह्लाद सिंह साहनी 2019 में आम आदमी पार्टी में चले गए थे। 2020 में शोएब इकबाल भी कांग्रेस छोड़कर आम आदमी पार्टी में चले गए थे, जो कि मटिया महल सीट से 5 बार कांग्रेस के एमएलए निर्वाचित हुए थे।
वहीं धनवती चंदेल और राजकुमारी ढिल्लन ने 2020 के विधानसभा चुनावों से पहले आम आदमी पार्टी की झाड़ू पकड़ ली थी। जबकि, तिमारपुर सीट से दो बार के पूर्व कांग्रेस एमएलए सुरेंद्र पाल सिंह बिट्टू ने जुलाई 2019 में बीजेपी का कमल थाम लिया था।
सातों संयोजकों की रिपोर्ट का इंतजार, फिर दिल्ली में सियासी वॉर!
गौरतलब है कि सोमवार को ही कांग्रेस ने दिल्ली की सभी सातों विधानसभा सीटों के लिए संयोजकों की नियुक्ति की है, जो दिल्ली में पार्टी के पुनर्गठन को लेकर 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपने वाले हैं। लवली ने कहा है कि इन संयोजकों से रिपोर्ट मिलने के बाद पार्टी आगे की कार्रवाई करेगी।
उन्होंने आगे चलकर पार्टी की गतिविधियों में भारी बढ़ोतरी की बात कहते हुए बताया कि, '........अभी भी पार्टी चुप है, क्योंकि हमारा सारा फोकस संगठन को बदलने पर है। मुझे उम्मीद है कि दिल्ली कांग्रेस जल्द ही खुद को फिर से खड़ी कर लेगी।'
दिल्ली में पिछले दोनों लोकसभा चुनावों से सभी सात सीटें बीजेपी जीत रही है। जबकि, कांग्रेस 2015 और 2020 किसी भी विधानसभा चुनावों में भी अपना खाता नहीं खोल सकी है। यह वही कांग्रेस है, जिसने 2013 तक दिल्ली की गद्दी पर लगातार 15 वर्षों तक शासन किया था।
हालांकि, अभी तक तो विपक्षी दलों के इंडिया ब्लॉक की ओर से यही कहा जा रहा है कि वह 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को हराने के लिए हर लोकसभा सीट से एक ही उम्मीदवार उतारेंगे। लेकिन, दिल्ली की चुनावी राजनीति इस विपक्षी गठबंधन के लिए सबसे बड़ा सवाल होगा।
क्योंकि, यहां पिछले लोकसभा चुनावों में सात में से पांच सीटों पर कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही थी और आम आदमी पार्टी दो सीटों पर दूसरे स्थान पर आई थी। ऐसे में सीटों का कोई सहमति वाला फॉर्मूला निकालना बहुत बड़ी चुनौती साबित होने वाला है; और कांग्रेस की तैयारियां इसी चुनौती के 'समाधान' की दिशा की ओर संकेत कर रहे हैं। (इनपुट-पीटीआई)












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