DefExpo 2018: एक नजर चीन की रणनीति पर, आर्म्स मार्केट पर छाने की तैयारी में ड्रैगन
नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के तिरुविदाताई में 'डिफेंस एक्सपो इंडिया-2108' की शुरुआत हो चुकी है। 14 अप्रैल तक चलने वाले कार्यक्रम में पहली बार दुनिया की कई कंपनियों के सामने भारत अपनी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को प्रोजेक्ट कर रहा है। चार दिन तक चलने वाले इस डिफेंस एक्सपो की थीम 'India: The Emerging Defence Manufacturing Hub'रखी गई है। इसी बीच चीन से चौंकाने वाली खबर आई है। दुनिया भर के बाजारों में अपने प्रोडक्ट्स को लोहा मनवाने वाला चीन अब आर्म्स मार्केट में भी छाने की तैयारी कर रहा है। चीन अब ठीक उसी तरह से हथियारों के बाजार में उतरने की तैयारी कर रहा है, जिस प्रकार से अमेरिका और यूरोप लंबे समय से करते आ रहे हैं। आसान शब्दों में कहें तो चीन अब 'स्ट्रेटिजिक बिजनेस डील' को बड़ा हथियार बनाने जा रहा है। मतलब ड्रैगन अब उन देशों को अपनी आर्म्स टेक्नोलॉजी बेचेगा, जिन्हें वह अपना दोस्त मानता है।साउथ चाइना सी

पोस्ट रिपोर्ट का खुलासा
साउथ चाइना सी पोस्ट की ताजा रिपोर्ट में चीनी सेना के सूत्रों के हवाले से खुलासा किया गया है कि हाल ही में चाइना शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री कोऑपरेशन (CSIC) और रॉयल थाई आर्म्ड फोर्सेज ने एक समझौता किया है। इसके तहत दोनों देश मिलकर हथियार बनाएंगे और टेक्नोलॉजी पर भी काम करेंगे। अखबार ने चीनी सेना के इनसाइडर के हवाले से बताया है कि ड्रैगन थाईलैंड को कई ऐसे हथियार भी देने जा रहा है, जो सबमरीन में इस्तेमाल होते हैं। इसके अलावा सबमरीन से जुड़ी टेक्नोलॉजी भी थाईलैंड को ट्रांसफर की जाएगी। दरअसल, थाईलैंड चीन के 'वन बेल्ट, वन रोड' प्रोजेक्ट में मददगार रहा है, इसलिए चीन उसे हथियार और टेक्नोलॉजी देने को राजी हो गया। ठीक उसी तरह जैसे अमेरिका और यूरोपीय देश अपने रणनीतिक साझीदारों को आधुनिक हथियार और टेक्नोलॉजी उपलब्ध करा रहे हैं। मतलब वे बिजनेस तो कर ही रहे हैं, लेकिन अपने सामरिक हितों का भी पूरा ख्याल रख रहे हैं।
चीन ने सऊदी अरब के साथ की थी डील
करीब एक साल पहले चीन ने सऊदी अरब के साथ भी डील की थी। चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी कॉपरेशन (CASC) ने यह समझौता किया था। सऊदी अरब के साथ इस डील की मदद से चीन पश्चिम एशिया में अपनी पहली फैक्ट्री स्थापित करेगा, जिसमें चीन के ड्रोन Rainbow 4 बनाए जाएंगे। चीन ऐसी ही फैक्ट्री पाकिस्तान और म्यांमार में स्थापित कर चुका है।
मिलिट्री ऑब्जर्वर झाऊ चेनमिंग का कहना है कि सऊदी अरब के साथ चीन की डील उस रणनीति का हिस्सा है, जिसकी मदद से चीन खुद को ग्लोबल आर्म्स ब्रैंड के तौर पर पेश कर रहा है। हालांकि चेनमिंग का मानना है कि चीनी हथियार यूरोपीय देशों की तुलना में थोड़े महंगे हैं, क्योंकि इनकी प्रॉडक्शन कॉस्ट ज्यादा है। चीन को चाहिए कि वह बढ़ते मुकाबले को ध्यान में रखते हुए हथियारों की कीमत को गिराने की दिशा में प्रयास करे।












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