रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन का नाम लिए बिना दिया बयान, टू प्लस टू बैठक में रशिया के मंत्रियों से की वार्ता
नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता से पहले सोमवार को रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की। विदेश मंत्रालय से पिछले महीने कहा था कि भारत और रूसी संघ के बीच टू प्लस टू वार्ता के एजेंडे में पारस्परिक हित के राजनीतिक और रक्षा मुद्दे शामिल होंगे। इसी क्रम में आज हुई बैठक के दौरान रूस और भारत के द्विपक्षीय सहयोग को मजबूती देने सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि इससे पूर्व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई शोइगु के साथ दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में बैठक की।

बताया जा रहा है कि इस दौरान कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। जिनमें S400 मिसाइल की समय से सप्लाई सुनिश्चित करना और आने वाले दो S400 की तैनाती में रूस द्वारा मदद को प्रभावी तरीके से पहुंचाने की बात हुई। वहीं चीन का नाम लिए बिना भारत ने सोमवार को रूस के साथ पहले 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता के दौरान लद्दाख में जारी गतिरोध का मुद्दा उठाया। बातचीत के दौरान, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने क्रमशः अपने रूसी समकक्ष सर्गेई शोइगु और सर्गेई लावरोव के साथ बातचीत की।
2+2 वार्ता के उद्घाटन भाषण में राजनाथ सिंह ने कहा, "मुझे उन उभरती चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा करने का अवसर मिला है जिनका भारत सामना कर रहा है और रूस के साथ घनिष्ठ सैन्य और सैन्य-तकनीकी सहयोग के लिए भारत की बढ़ी हुई आवश्यकता है।
इसके अलावा चीन का जिक्र किये बिना केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि महामारी, हमारे पड़ोस में असाधारण सैन्यीकरण और हथियारों का विस्तार और 2020 की गर्मियों की शुरुआत से हमारी उत्तरी सीमा पर अकारण आक्रामकता ने कई चुनौतियों को जन्म दिया है। भारत मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और अपने लोगों की अंतर्निहित क्षमताओं के साथ इन चुनौतियों से पार पाने के लिए आश्वस्त है। केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सिंह ने यह भी कहा कि भारत और रूस के बीच रक्षा संबंध हाल के दिनों में अभूतपूर्व तरीके से आगे बढ़े हैं।
रूसी रक्षा मंत्री शोइगु ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि भारत और रूस अपने रक्षा और सुरक्षा संबंधों का विस्तार और विस्तार करेंगे। दोनों देशों ने 10 साल लंबे सैन्य-तकनीकी सहयोग समझौते पर भी हस्ताक्षर किए और उत्तर प्रदेश में AK203 असॉल्ट राइफलों की छह लाख इकाइयों के निर्माण के अनुबंध को सील कर दिया।












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