रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रूस के दौरे पर रवाना, चीनी नेताओं से नहीं करेंगे मुलाकात
नई दिल्ली: भारत-चीन सीमा के लद्दाख सेक्टर में पिछले डेढ़ महीने से विवाद जारी है। हाल ही में दोनों देशों के बीच हुई झड़प के बाद से गलवान घाटी में हालात और चिंताजनक हो गए हैं। इस बीच सोमवार सुबह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रूस के तीन दिवसीय दौरे पर रवाना हुए। राजनाथ सिंह मॉस्को में विक्ट्री डे परेड के 75वें साल पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इस कार्यक्रम में चीन के मंत्री भी शामिल होंगे, लेकिन भारत सरकार ने पहले ही साफ कर दिया है कि रक्षा मंत्री चीनी नेताओं से मुलाकात नहीं करेंगे। सीमा विवाद के बीच रक्षा मंत्री का ये दौरा काफी अहम माना जा रहा है।
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रूस रवाना होने से पहले रक्षा मंत्री ने ट्वीट करते हुए लिखा कि तीन दिन की मॉस्को यात्रा पर जा रहा हूं। इस दौरान भारत-रूस के बीच रक्षा और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का मौका मिलेगा। साथ ही 75वें विक्ट्री डे परेड में भी शामिल होऊंगा। विशेषज्ञों की मानें तो रक्षा मंत्री रूस दौरे के दौरान एस-400 मिसाइल सिस्टम की जल्द आपूर्ति समेत कई रक्षा सौदों पर चर्चा कर सकते हैं। भारत और रूस के कूटनीतिक रिश्ते काफी पुराने हैं। हर मुश्किल वक्त में दोनों देश एक-दूसरे के साथ खड़े नजर आते हैं। भारत-चीन सीमा विवाद पर भी रूस नजर बनाए हुए है।
विक्ट्री डे परेड इस बार भारत के लिए भी काफी खास है, क्योंकि भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना का दस्ता भी इस परेड में हिस्सा लेगा। सिख लाइट इंफेंट्री ने दूसरे विश्व युद्ध में हिस्सा लिया था और कई वीरता पदक भी हासिल किए थे। इस वजह से इंफेंट्री के मेजर रैंक के अधिकारी परेड का नेतृत्व करेंगे।
दौरे से पहले कई अहम फैसले
रूस की यात्रा पर रवाना होने से पहले रक्षा मंत्री ने रविवार को तीनों सेना प्रमुखों और CDS बिपिन रावत से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने लद्दाख के हालात की समीक्षा की। इस बीच केंद्र सरकार ने भी सेना को चीन के खिलाफ किसी भी तरह कार्रवाई के लिए खुली छूट दे दी है। साथ ही हथियार और गोलाबारूद खरीदने के लिए इमरजेंसी फंड भी जारी कर दिया गया है।












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