बस मेरी बेटी को सही सलामत घर पहुंचा दो....यूक्रेन में फंसी लखनऊ की बेटी के पिता ने बयां किया दर्द

बस मेरी बेटी को सही सलामत घर पहुंचा दो....यूक्रेन में फंसी बेटी के पिता ने बयां किया दर्द

नई दिल्‍ली, 01 मार्च: रूसी हमले के बाद यूक्रेन के हालात हर पल बद्दतर होते जा रहे हैं। मंगलवार की सुबह एक भारतीय छात्र की खार्कीव में रूसी सैनिकों के गोली मारे जाने से मौत हो गई है। जिसके बाद यक्रेन में फंसे हुए छात्रों के परिजनों की चिंता और बढ़ गई है। कर्नाटक के बेटे नवीन की मौत के बाद अभिभावकों का चिंता के मारे बुरा हाल है। इन्‍हीं अभिभावकों में लखनऊ की एक बेटी के पिता भी शामिल हैं जिसने वन इंडिया से बात करते हुए अपना दर्द बयां किया है।

मेरी बेटी को किसी से नहीं मिली मदद

मेरी बेटी को किसी से नहीं मिली मदद

पूजा (काल्‍पनिक नाम) के पिता ने बताया कि उनकी बेटी यूकेन के खार्कीव में मेडिकल के चौथे इयर की पढ़ाई कर रही है। वो खार्कीव से लगातार फोन पर उनके संपर्क में हैं, वहां उसे किसी से कोई भी मदद नहीं मिली। बड़ी मुस्किल से मंगलवार को कुछ भारतीयों के ग्रुप के साथ वो ट्रेन में सवार होकर स्‍लोवॉकियां के लिए निकली है, जहां पर बॉडर पर पहुंचने के बाद उसे फ्लाइट मिल सकती हैं।

बस मेरी बेटी सही सलामत घर वापस आ जाए

बस मेरी बेटी सही सलामत घर वापस आ जाए

पिता ने बताया आज सुबह उससे बात हुई उसके बाद उससे संपर्क नहीं हो पा रहा है। जिसके कारण हमारी चिंता और बढ़ गई है। पिता ने कहा बस अब हम भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि मेरी बेटी सही सलामत घर वापस लौट आएं। मेरे बेटी कब पहुंचेगी ये हमें नहीं पता, जब तक मेरी बेटी मेरे सामने नहीं आ जाती तब तक हम कैसे मान ले कि वो वहां से निकल आई है।

बिहार के छात्र ने कहा ...हम नहीं जानते हमारे साथ क्‍या होगा?

बिहार के छात्र ने कहा ...हम नहीं जानते हमारे साथ क्‍या होगा?

वहीं यूक्रेन के डेनिप्रो में मेडिकल फिफ्थ इयर में पढ़ने वाले एक छात्र ने फोन पर बताया कि उन्‍हें कोई भी सरकारी मदद नहीं मिल रही हैं कोई भी उनका फोन और मैसेज रिप्‍लाई नहीं कर रहा है। लंबे समय तक छिपे रहने के बाद हम कुछ भारतीय छात्रों ने मिलकर एक बस किराए पर की है और यूक्रेन बॉडर के लिए निकले हैं। बिहार के मूल निवासी इस छात्र ने बताया कि चारों ओर से बम बारी और गोलियों की आवाजें आ रही थी, लेकिन सोमवार को लड़ाई थोड़ी कम हुई तो हमने वहां से अपनी जान बचाकर निकले हैं। जब तक भारत की सरजमीं पर पैर नहीं रखते तब तक हम नहीं जानते हमारे साथ क्‍या होगा।

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