क्या दिल्ली में आप-कांग्रेस का गठबंधन भाजपा को चुनाव हरा सकता था?
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन की कई कोशिशें की बावजूद इसके दोनों ही दलों के बीच गठबंधन नहीं हो सका। आप कई बार यह कहती रही कि अगर कांग्रेस के साथ उसका गठबंधन होता है तो हम दिल्ली की सभी 7 सीटों पर भाजपा को हरा सकते हैं। लेकिन अंतिम समय तक दोनों दलों के बीच गठबंधन नहीं हो सका। हालांकि खुद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी के नेताओं के खिलाफ जाते हुए आप के साथ गठबंधन के लिए आगे आए और उन्होंने आप के सामने गठबंधन की बात रखी, लेकिन दोनों दलों के बीच आपसी सहमति नहीं बन सकी, यही वजह रही की आप इस लोकसभा चुनाव में सिर्फ एक सीट जीत सकी लेकिन दिल्ली की सभी 7 सीटों पर उसे हार का सामना करना पड़ा। आप की ओर से सिर्फ भगवंत मान ने पंजाब से जीत दर्ज की है।

हालांकि अरविंद केजरीवाल का दावा था कि आपृ-कांग्रेस का गठबंधन होता है तो दिल्ली की सभी सात सीटों पर उन्हें जीत मिलेगी, लेकिन चुनाव बाद जो आंकड़े सामने आए हैं वह उनके दावे से बिल्कुल उलट हैं। दिल्ली की सभी सात सीटों पर हुए मतदान फीसदी की बात करें और कांग्रेस और आप को मिले वोटों को मिला दें तो भी दिल्ली की सातों सीटों पर आप-कांग्रेस का गठबंधन भाजपा को हरा पाने में सफल नहीं होता। आंकड़े के अनुसार यह गठबंधन सिर्फ चांदनी चौक में कुछ हद तक भाजपा को चुनौती दे पाता जहां कांग्रेस को 29.09 फीसदी वोट मिले, जबकि आप को 14.9 फीसदी वोट मिले। दोनों ही दलों का गठबंधन होता तो भाजपा को कड़ी चुनौती मिल सकती थी। आंकड़ों के अनुसार पश्चिमी दिल्ली में आप और कांग्रेस दोनों मिलाकर 37.38 फीसदी वोट मिला था, जबकि अकेले भाजपा को यहां 60.06 फीसदी वोट मिला।
दिलचस्प बात यह है कि इस बार के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने सा सिर्फ सर्वाधिक सीटें जीतने के मामले में इतिहास दर्ज किया है, बल्कि मतदान फीसदी के मामले में जबरदस्त कीर्तिमान स्थापित किया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो भारतीय जनता पार्टी ने इस बार 12 राज्यों में 50 फीसदी से अधिक वोट हासिल किए हैं। भाजपा का वोट फीसदी जम्मू कश्मीर से लेकर केरल तक बढ़ा है। भाजपा ने अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, हरियाणा, गुजरात, गोवा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और दिल्ली में जबरदस्त प्रदर्शन किया और यहां 50 फीसदी से अधिक वोट हासिल किया। वहीं उत्तर प्रदेश में भाजपा ने अपने सहयोगी दल अपना दल के साथ मिलकर 50 फीसदी वोट शेयर का आकड़ा पार किया है।












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