भारत में वायु प्रदूषण की भयावह स्थिति, लैंसेट का दावा, जहरीली हवा ने छीन ली 16.7 लाख लोगों की जिंदगी
मेडिकल जर्नल लैंसेट ने अपने रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा किया है। यह खुलासा भारत में प्रदूषण की गंभीर स्थिति को बता रहा है। भारत में ज
नई दिल्ली, 18 मई: मेडिकल जर्नल लैंसेट ने अपने रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा किया है। यह खुलासा भारत में प्रदूषण की गंभीर स्थिति को बता रहा है। भारत में जानलेवा प्रदूषण से हो रही मौतों को लेकर अध्ययन में खुलासा हुआ है। लैंसेट ने अपनी रिसर्च में दावा किया है कि भारत में 2019 में प्रदूषण से 23.5 लाख लोगों की मौत हुई है। ये सभी मौतें समय से पहले हुई हैं।

लैंसेट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर 2019 में 90 लाख की मौत हुई। दुनिया भर में वायु प्रदूषण से 66.7 लाख लोगों की मौत हुई। वहीं, भारत में वायु प्रदूषण से 16.7 लाख लोगों की मौत हुई है। वैश्विक स्तर पर ये सभी देशों से अधिक मौतें हैं। जिसमें PM2.5 प्रदूषण के चलते सबसे अधिक 9.8 लाख लोगों की मौत हुई है। हवा में छोटे प्रदूषण कण जो ढाई माइक्रोन या उससे कम चौड़ाई वाले लोगों की मौत के लिए घातक है। बाकी 6.1 लाख लोगों की मौत घरेलू प्रदूषण से हुई है।
प्रदूषण का स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव
स्वास्थ्य और प्रदूषण पर ग्लोबल एलायंस, जिनेवा, स्विट्जरलैंड के अध्ययन के प्रमुख लेखक रिचर्ड फुलर ने कहा कि प्रदूषण का स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। लोअर और मिडिल क्लास वाले देश इसका सबसे अधिक खामियाजा भुगतते हैं। साथ ही बताया गया कि स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक प्रभावों के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंडे में प्रदूषण की रोकथाम को काफी हद तक नजरअंदाज कर दिया गया है।
उत्तरी भारत में वायु प्रदूषण बेहद गंभीर
फुलर ने अपने बयान में कहा कि प्रदूषण पर रोकथाम के लिए अब थोड़ा ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन इसके फंड में मामूली वृद्धि की गई है। शोधकर्ताओं ने कहा कि उत्तरी भारत में वायु प्रदूषण बेहद गंभीर है। उद्योग, कृषि और अन्य गतिविधियों के चलते प्रदूषण काफी बढ़ रहा है। अध्ययन के अनुसार, घरों में लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाना वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण था, कोयले का दहन और फसल जलाना भी इसमें शामिल है।












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