आटा चक्की को लग गया दलित का हाथ, उच्च जाति के अध्यापक ने काटी गर्दन
उत्तराखंड। उत्तराखंड में एक दलित के आटा चक्की को छू लेने पर, चक्की के अशुद्ध हो जाने की बात कहते हुए उच्च जाति के अध्यापक ने दरांती से हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया।

उत्तराखंड में बागेश्वर जिले के कडारिया गांव में एक दलित की हत्या का मामला सामने आया है। दलित की हत्या के पीछे जाति के खिलाफ टिप्पणी और उसका विरोध की बात सामने आई है।
घटना तब हुई जब कडारिया का रहने वाला सोहनराम (35) गांव की ही आटा चक्की पर अनाज की खाली बोरियां लेने के लिए गया था। वहां जब वो चक्की के भीतर बोरियां इकट्ठी कर रहा था तो वहां बैठे प्राथमिक विद्यालय के अध्यापक घनश्याम कर्नाटक ने उस पर जाति को लेकर टिप्पणी की।
घनश्याम ने सोहनराम पर चक्की को छूकर उसे अशुद्ध कर देने की बात कहते हुए उसे गाली दी, जिससे आहत होकर सोहनराम ने घनश्याम को इस तरह की बात ना कहने को कहा। इस पर घनश्याम का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और अपने सामने जुबान चलाने की बात कहते हुए सोहन पर दरांती से हमला कर दिया।
दरांती से गर्दन पर हुए वार से सोहनराम का गला कट गया और वो जमीन पर गिर पड़ा। अत्यधिक खून बहने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने बताया है कि ये घटना मंगलवार की शाम हुई। पुलिस ने घनश्याम, उसके पुत्र और पिता पर मामला दर्ज कर मुख्य आरोपी घनश्याम को गिरफ्तार कर लिया है।
'उच्च जाति के लोगों ने नवराात्रि में चक्की से आटा लेने को मना किया है'
आटा चक्की चलाने वाले कुंदन सिंह भंडारी के अनुसार, सोहन अक्सर ही उसके यहां आया करता था। वो उसके यहां से गेंहू की खाली बोरियां ले जाता था। कुंदन के अनुसार मंगलवार शाम जब सोहन आया तो घनश्याम भी वहां आ गया और उसे चक्की के पास देख सब अशुद्ध कर देने की बात कहते हुए गालियां देने लगा, जिसके बाद सोहनराम ने इसका विरोध किया तो उसपर दरांती से हमला कर दिया गया।
मृतक के चाचा केशव सिंह ने कहा कि उच्च जाति के लोगों के साथ-साथ दलित भी इसी आटा चक्की से आटा लेते रहे हैं। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले नवरात्रि के चलते उच्च जाति के लोगों ने चक्की से आटा ना लेने की धमकी दी हुई है। दलितों को कहा गया है कि देवियों को प्रसाद के लिए आटा तैयार हो जाने के बाद ही वो चक्की से आटा लें।
सोहनराम की मौत पर प्रदेश में दलितों ने जगह-जगह विरोध प्रदर्शन किए हैं। दलितों ने आरापियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। कई दलित संगठनों ने दलितों को लगातार निशाना बनाए जाने पर निराशा जताई है।












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