दादरी हत्याकांड: पॉलिथिन में बकरे का पांव था या बछड़े का पांव, जल्द उठेगा पर्दा
नोएडा (ब्यूरो)। ग्रेटर नोएडा के दादरी इलाके के बिसाहड़ा गांव में गोमांस पकाने की अफवाह को लेकर मारे गये अखलाक को लेकर सियासत तेज हो गई है। नेताओं के बयान और पुलिसिया कार्रवाई को लेकर लोगों में खासा रोष भी है। मगर अभी तक यह साफ नहीं हो सका है कि उस रात पका क्या था, बकरा या बछड़ा? हालांकि प्रारंभिक जांच में पुलिस के अधिकारियों ने माना था कि वह गाय का नहीं बल्कि बकरे का गोश्त था।

तो सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसे कौन से हालात पैदा हुए कि बकरे का पांव बछड़े के पैर में तब्दील हो गया। लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (एलआईयू) की सूत्रों पर यकीन करें तो हत्या के करीब 40 मिनट पहले एक पॉलिथिन में बकरे के पैर लपेट कर घर के बाहर फेंके थे। सूत्रों के मुताबिक वहां से 5-6 लड़के गुजर रहे थे जिन्होंने उस पॉलिथिन को उठाया और जब उसे अंधेरे में खोलकर देखा तो गलतफहमी में बकरे को पांव को पछड़े का पांव समझ लिया। धीरे-धीरे ये बात जंगल के आग की तरह फैल गई।
एलआईयू के मुताबिक थोड़ी ही देर में जारचा गांव के चौराहे पर एक विशेष समुदाय की भीड़ इकट्ठा हो गई और लोगों ने अखलाक पर गौ-हत्या का आरोप लगा दिया। किसी भी मामले को अखिरी तह तक कवर करने वाली वेबसाइट इंडिया संवाद में प्रकाशित खबर की मानें तो इसी बीच गांव के कुछ दंबंग किस्म के लड़के पास के मंदिर में पहुंचे और आपत्तिजनक अनाउंसमेंट करवा दिया। हालांकि मीट के टुकड़ों को फोरेंसिक लैब में जांच के लिए भेज दिया गया है जहां वैज्ञानिक तौर पर तय हो सकेगा कि अखलाक ने बकरी के पांव फेंके थे या बछड़े के।
दादरी कांड पर हो रही है राजनीति
लखनऊ में अखलाक के परिजनों से मिलने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि इस मामले में राजनीति की जा रही है। उन्होंने कहा कि अखलाक के परिवार को न्याय जरूर मिलेगा और इस घटना के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अखिलेश यादव ने कहा कि देश की ताकत भाइचारा है और यह खत्म नहीं होना चाहिए।












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