सीतारमण की अध्यक्षता में आज हुई DAC ने की बैठक, 1850 करोड़ रुपए की खरीद की मंजूरी
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने आज मुलाकात की और 1850 करोड़ रुपये से अधिक की सेवाओं के पूंजी अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी। इनमें ऑर्डनेंस फॅक्टरी बोर्ड (ओएफबी) से 1125 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित लागत पर मशीनीकृत इन्फैंट्री और अन्य शस्त्रों और सेवाओं के लिए इन्फैंट्री कॉम्बोट वाहन की आवश्यक मात्रा की खरीद शामिल है । यह खरीद मैकेनाइज्ड बलों की तेजी से तैनाती में सैनिकों की परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करेगा। भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में हाइड्रोग्राफिक अभियानों में एक प्रमुख भूमिका निभाई है। डीएसी ने बंदरगाहों, बंदरगाहों, विशेष आर्थिक क्षेत्र आदि में नौसेना के बढ़ते हुए 'जलविज्ञान सर्वेक्षण' को पूरा करने के लिए एक सर्वेक्षण प्रशिक्षण पोत (एसटीवी) की खरीद के लिए अनुमोदन किया। इस जहाज का निर्माण 626 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर भारतीय शिपयार्ड द्वारा (भारतीय आईडीडीएम) के तहत 626 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर भारतीय शिपयार्ड द्वारा किया जाना है।

गौरतलब है कि इससे पहले 15,935 करोड़ रुपये सौदे को मंजूरी दे दी। इसके तहत अब सशस्त्र बलों की शक्ति में इजाफा होगा, सरकार द्वारा दी गई मंजूरी के बाद 7.40 लाख असॉल्ट राइफलों, 5,719 स्नाइपर राइफलों और लाइट मशीन गनों को सेना द्वारा खरीदा जाएगा। बता दें, ये प्रस्ताव काफी समय से लंबित था। देश में रक्षा मंत्रालय की निर्णय रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) द्वारा लिए जाते हैं।
ये राइफलें सरकार द्वारा संचालित आयुध फैक्टरियों और निजी क्षेत्रों द्वारा बनाई जाएंगी, इसे 'बाय एंड मेक इंडियन' श्रेणी का नाम दिया गया है। मंत्रालय द्वारा जारी किए गए एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि 'बॉय एंड मेक श्रेणी के तहत संतुलित मात्रा में खरीद के लिए एक साझा प्रस्ताव पर प्रक्रिया चल रही है।'












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