माओवादी नहीं, मलेरिया मारता सीआरपीएफ जवानों को

नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) यकीन मानिए कि झारखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार के घने जंगलों में माओवादियों से लड़ रहे सीआरपीएफ के जवानों को मच्छरों ने जीना हराम कर रखा है। इसके अलावा इन्हें कई दूसरे रोग भी अपनी चपेट में ले लेते हैं। इनमें मलेऱिया का नाम लिया जा सकता है।

CRPF jawans face tough time from Malaria

सबसे बड़ा सशस्त्र बल

बता दें कि सीआरपीएफ ही माओवादियों का सफाया करने में लगी है। ये दुनिया का सबसे बड़ा सशस्त्र बल है।गृह मंत्रालय की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार,साल 2014 में सीआरपीएफ के 50 जवान माओवादियों से लड़ते हुए शहीद हुए। 95 विभिन्न रोगों के कारण मारे गए। इनमें से 27 मलेरिया के कारण और 35 हार्ट अटैक के कारण जान गंवा बैठे।

कठिन हालात

जानकारों ने बताया कि माओवादियों से लड़ रहे सीआरपीएफ के जवान बेहद कठिन हालतों में काम करते हैं। ये घर से सैकड़ों मील दूर माओवादियों से लोहा लेते हैं। ये जिधर से काम करते हैं, वहां पर इन्हें बेहतर हेल्थ सर्विसेज भी नहीं मिल पाती। जंगलों में बीमार होने के चलते इन्हें तुरंत इलाज भी नहीं मिल पाता।

कब आती याद

सीआरपीएफ के एक अफसर ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि नेताओं को उनकी याद तब है जब कोई माओवादी हमले में उनके बल का जवान शहीद होता है। इसके अलावा उन्हें कोई नहीं पूछता।

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