जन्मदिन से लेकर पुण्यतिथि पर नेताओं ने किए कराड़ो खर्च
नई दिल्ली। सरकार के सामने बहुत सारी ऐसी समस्याएं हैं। जिन पर पैसा खर्च करके उनका समाधान किया जा सकता है। मगर समस्याओं की अनदेखी करते हुए देश के नेता जन्मदिन को खास बनाने में करोड़ों खर्च कर देते हैं। लेकिन नेताओं को क्या, पैसा कौन सा नेताजी की जेब से निकलता है। आम नागरिकों की खून पैसे की कमाई अपने जन्मदिन को खास तरीके से मनाने में धुंए की तरह उड़ा देते हैं। राजनीति इतिहास को उठा कर देखा जाए मुलायम सिंह यादव ही नहीं, बसपा सुप्रीमा मायावती सहित पूर्व नेताओं की पुण्य तिथि-जन्मदिन पर सोनिया गांधी ने भी जनता की गाढ़ी कमाई को पानी की तरह बहाया है।

जन्मदिन के पोस्टर पर लाखों खर्च
पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने साल 2012 में अपना जन्मदिन भव्यता से मनाने के लिए करोड़ों खर्च डाले थे। अपने जन्मदिन पर महंगे पोस्टर, कटआउट और विज्ञापनों पर ही उन्होंने लाखों रुपए खर्च किए थे। इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी अच्छा-खासा खर्चा किया गया। हालांकि सोनिया गांधी ने जन्मदिन पर फिजूल खर्जी करने से नेताओं को मना किया था।
मुलायम के जन्मदिन पर करोड़ों खर्च
समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव का 22 नवंबर को जन्मदिन है। पिता का जन्मदिन मनाने के लिए अखिलेश यादव करोड़ों रुपया पानी की तरह बहा रहे हैं। रात के जश्न के लिए भी पूरा इंतजाम किया गया। इसके लिए सांस्कृतिक मंत्रालय की ओर से 20 लाख रुपए दिए गए हैं। इतना ही गीत-संगीत की महफिल पर भी कम रुपया नहीं बहाया जा रहा है।
-संगीत की महफिल सजाने के लिए हंसराज हंस को 11.75 लाख रुपए, साबरी ब्रदर्स को 4.50 लाख और फिरोज खान को 3.3 लाख रुपए दिए गए हैं।
-आजम खान द्वारा लंदन से करोड़ों रुपए खर्च कर बग्घी मंगाई गई।
-मेहमानों के लिए प्राइवेट प्लेनों से लाने ले जाने पर लाखों खर्च
-अतिथियों को समारोह स्थल तक लाने के लिए लग्जरी गाडि़यों की व्यवस्था।
-समारोह स्थल के आकर्षक पंडाल पर 2 करोड़ रुपए खर्च
-75 फिट का सबसे मंहगा केक काटा जाएगा।
जन्मदिन ही नहीं पुण्यतिथि पर भी करोड़ो खर्च
कांग्रेस सरकार पार्टी कार्यकर्ताओं से फिजूलखर्ची कम करने की बात करती रही। मगर खुद ही पूर्व नेताओं राजीव गांधी, इंदिरा गांधी और जवाहरलाल नेहरु के जन्मदिन व पुण्यतिथि के विज्ञापन पर करोड़ों खर्च कर डाले। पूर्व नेताओं के जन्मदिन और पुण्यतिथि से संबंधित जितने भी विज्ञापन समाचार पत्रों में छपवाए गए उनमें से एक 53 करोड़ तिहाई से ज्यादा खर्च सिर्फ राजीव गांधी, इंदिरा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के विज्ञापन पर हुए।
पूर्व नेताओं की पुण्यतिथि-जन्मदिन के विज्ञापन पर 142.3 करोड़ खर्च
-महात्मा गांधी की जन्मतिथि और पुण्यतिथि पर 38.3 करोड़ रुपये (विज्ञापनों के लिए महात्मा गांधी के अकाउंट में सबसे अधिक राशि आवंटित होती है)
-बी आर आम्बेडकर अकेले ऐसे गैर-नेहरू-गाँधी परिवार से ताल्लुक रखने वाली शख़्सियत हैं, जिनके विज्ञापन के लिए सरकार 10 करोड़ से ज्यादा की धनराशि आवंटित करती है।
-लिस्ट में टॉप फाइव लीडर्स के नाम पर 100 करोड़ से ज्यादा की राशि आवंटित होती है जो कुल खर्च का दो-तिहाई से भी ज्यादा है।
- सरकार ने सरदार पटेल की जन्मतिथि और पुण्यतिथि पर 8.6 करोड़ रुपये खर्च किए
-बाबू जगजीवन राम को लोगों की याद में ताजा रखने के लिए 6.2 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
-पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के विज्ञापन पर 3 करोड़.
-मौलाना आजाद पर 2 करोड़ की राशि खर्च की गई।
-एस राधाकृष्णन पर और 1.2 करोड़ की राशि खर्च की गई।
-भगत सिंह, राज गुरु और सुखदेव की शहादत को याद करने में 9.7 करोड़ की राशि खर्च हुई.
-नेताजी सुभाष चंद्र बोस और स्वामी विवेकानंद पर 50 लाख और 90 लाख खर्च किए गए।
डायरेक्टरेट ऑफ एडवर्टाइजमेंट एंड विजुअल पब्लिसिटी (डीएवीपी) के मुताबिक, 2008-09 से 2012-13 के बीच सरकार ने 15 पूर्व नेताओं की जन्मतिथि और पुण्यतिथि पर विज्ञापन छपवाए। इस तरह के कुल विज्ञापनों पर 142.3 करोड़ का खर्च आया और इसमें से 53.2 करोड़ का खर्च अकेले इन तीन शख्सियतों पर किया गया।
माया के जन्मदिन पर करोड़ों की सजावट
मैडम माया के जन्मदिन को हर साल खास तरीके से मनाया जाता है। जिस पर अरबों भी खर्च हो जाएं तो कोई चिंता नहीं। बीते साल में मायावती के जन्म दिन से 10 दिन पहले पूरे लखनऊ को दुल्हन की तरह सजाया गया। सरकारी आंकड़ों की माने तो सजावट पर लगभग '5 करोड़' रुपया खर्च हुआ था। इतना ही नहीं करीब 4 हजार करोड़ की लागत से तैयार कराए गए दलित महापुरुषों के नाम पर बने स्मारकों और पार्कों पर सजावट हुई। गोमतीनगर और आशियाना में बने अंबेडकर और कांशीराम के नाम पर बने स्मारकों पर जबरदस्त सजावट की गई।












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