किस नदी में छोड़े जा रहे हैं घड़ियाल
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) तेजी से समाप्त हो रहे घड़ियालों को बचाने के लिए गंधक नदी में कल 12 घडियाल छोड़े गए। इनमें से 11 मादा घड़ियाल थे। बिहार राज्य वन विभाग ने वाइल्डलाइफ ट्रस्ट आफ इंडिया के साथ मिलकर इन घड़ियालों की प्रजाति को बचाने का बीड़ा उठाया है। नदी में इन्हें छोड़ने के पीछे मकसद इन्हें बचाना है।

घड़ियाल घटे
कहते हैं कि एक दौर में इस नदी में बड़ी संख्या में घड़ियाल होते थे। बाद के समय में इनकी तादाद घटने लगी। दरअसल संरक्षणविदों उन वजहों का पता लगाने में जुटे हैं जिनके चलते भारत की नदियों में मौजूद घडियाल काल के गाल में समा रहे हैं। जानकारों मानना है कि जंगली इलाके में अब सिर्फ 1500 घड़ियाल ही बचे हैं। इसमें से अधिकतर चंबल के किनारे संरक्षित इलाकों में हैं। चंबल में घड़ियालों की दुनिया की सबसे बड़ी 3 पीढ़ियों की आबादी है।
प्रजनन के बाद पाला-पोसा
इन घड़ियालों का पटना के संजय गांधी बायलोजिक्ल पार्क में प्रजनन किया गया और पाला-पोसा गया। इधर इस तरह का कार्यक्रम साल 2003-04 से चलाया जा रहा है। पिछले साल अप्रैल में भी गंधक नदी में छह घड़ियाल छोडे गए थे। इन सभी की लंबाई करीब डेढ़ मीटर है। जानकारी के अनुसार, उक्त प्रयासों से घड़ियालों की तादाद नदी में बढ़ने लगी है।
नजर आते बच्चे
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब इस नदी में घड़ियाल के बच्चे नजर आ रहे हैं। इसते चलते इस कार्यक्रम से जुड़े लोग खुश उत्साहित हैं। ऐसा माना जा रहा है कि जिस प्रकार घड़ियाल ने इस नदी में प्रजनन किया है उससे एक उम्मीद यह भी बंध चली है कि आने वाले दिनों में इधर घड़ियालों के प्रजनन के लिये एक मुफीद प्राकृतिक वास बन सकेगा।












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