नोटबंदी के चलते क्रेडिट ग्रोथ पहुंची 60 साल के निचले स्तर पर
भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने कहा है कि क्रेडिट ग्रोथ 60 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है। उनके अनुसार फरवरी में RBI दरों में कटौती कर सकता है।
नई दिल्ली। नोटबंदी से न सिर्फ लोगों को परेशानी हुई थी, बल्कि क्रेडिट ग्रोथ पर भी इसका खासा असर पड़ा है। भारतीय स्टेट बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक 23 दिसंबर को खत्म पखवाड़े में क्रेडिट ग्रोथ घटकर 5.1 फीसदी पर जा पहुंची है। भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने कहा है कि यह गिरावट दरअसल 60 साल के निचले स्तर के बराबर है। आपको बता दें कि 1954-55 में क्रेडिट ग्रोथ 1.7 फीसदी थी। घोष ने कहा कि दिसंबर तक 44 फीसदी करंसी को बदला जा चुका है और अगर इसी तरह से प्रिंटिंग जारी रही तो जनवरी के अंत तक 67 फीसदी और फरवरी के अंत तक 80-89 फीसदी करंसी बदली जा सकेगी।

नोटबंदी का असर क्रेडिट ग्रोथ पर ऐसा पड़ा है कि यह रिकॉर्ड निचले स्तर पर चली गई है। नोटबंदी के बाद अब बैंकों ने ब्याज दरों में भारी कटौती की है। बैंकों का मानना है कि जल्द ही क्रेडिट ग्रोथ फिर से सुधर जाएगी। वहीं जब सौम्य घोष से पूछा गया कि आखिर क्रेडिट ग्रोथ कब सुधरेगी, तो उन्होंने कहा कि ब्याज दरों में कटौती किए जाने की वजह से हाउसिंग सेक्टर के क्रेडिट ग्रोथ में बढ़ोत्तरी हो सकती है। इतना ही नहीं, घोष ने कहा है कि फरवरी में भारतीय रिजर्व बैंक दरों में कटौती कर सकता है। वे बोले कि अगर फरवरी तक भारतीय रिजर्व बैंक 80-89 फीसदी बैंक नोट बदल लेता है तो जीडीपी में सुधार आने की पूरी उम्मीद है।
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आपको बता दें कि मोदी सरकार की तरफ से 8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा की गई थी, जिसके तहत 1000 और 500 के पुराने नोटों पर बैन लगा दिया गया था। इन नोटों को बदलने की आखिरी तारीख 30 दिसंबर रखी गई थी, जो अब निकल चुकी है। मोदी सरकार ने दावा किया था कि इस फैसले से कालेधन पर लगाम लगेगी, लेकिन हाल ही में मीडिया में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 97 फीसदी पुराने नोट भारतीय रिजर्व बैंक के पास वापस पहुंच चुके हैं।












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