सीताराम येचुरी की तीसरी बार नहीं हो पाएगी राज्यसभा में वापसी, जानिए वजह
नई दिल्ली। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी अब तीसरी बार राज्यसभा नहीं जा पाएंगे। येचुरी के राज्यसभा जाने के रास्ते में उनकी अपनी पार्टी और उसके नियम ही रोड़ा बन गए हैं। बंगाल की सीपीएम यूनिट के साथ-साथ कांग्रेस की मदद से सीताराम येचुरी को राज्यसभा भेजने के प्रस्ताव को पार्टी की शीर्ष ईकाई यानी पोलित ब्यूरो ने खारिज कर दिया है। समिति की चार घंटे की चर्चा के बाद बंगाल यूनिट इस मामले को केंद्रीय समिति के सामने लेकर आए जबकि पोलित ब्यूरो (पीबी) दो बार उसके प्रस्ताव को रद्द कर चुकी थी।

येचुरी को तीसरी बार राज्यसभा भेजने के खिलाफ केंद्रीय समिति के 45-50 सदस्यों ने वोट किया। वहीं 25-30 ने उनका समर्थन किया। बंगाल के नेताओं का तर्क है कि यदि वह इस मौके का फायदा नहीं उठाते हैं तो पार्टी का उच्च सदन में पश्चिम बंगाल से कोई प्रतिनिधित्व नहीं रह जाएगा। कुछ नेताओं का कहना है कि यदि येचुरी निर्विरोध चुने जाते हैं तो कांग्रेस के वोट लेने की जरुरत ही नहीं पड़ेगी। वहीं कुछ का तर्क है कि येचुरी को विपक्षी राजनीति में सब जानते हैं और संसद में उनकी उपस्थिति से पार्टी की राष्ट्रीय स्तर पर पैठ बढ़ेगी।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि येचुरी को राज्यसभा न भेजना एक और ऐतिहासिक गलती होगी। पोलित ब्यूरो के सदस्य प्रकाश करात के नेतृत्व में एक वर्ग का कहना है कि वह कांगेस के समर्थन से येचुरी के राज्यसभा जाने का समर्थन नहीं करते हैं। उनका कहना है कि पार्टी के महासचिव का कांग्रेस के समर्थन से चुना जाना सीपीआईएम की उस विचारधारा के खिलाफ है जिसमें उस पार्टी के साथ गठबंधन न करने का फैसला लिया गया है।












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