कोरोना से ठीक होने वाले मरीज 3 महीने से पहले ही लगवा रहे हैं वैक्सीन, CoWin ऐप पर भी नहीं है कोई व्यवस्था
नई दिल्ली, मई 29। देश में टीकाकरण अभियान को शुरू हुए 4 महीने से उपर का समय हो चुका है और इन 4 महीनों में केंद्र सरकार ने टीकाकरण को लेकर कई नए नियम और दिशा-निर्देश लोगों के लिए जारी किए हैं। वैक्सीनेशन को लेकर हाल ही में केंद्र सरकार ने एक दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा था कि जो व्यक्ति कोरोना से रिकवर हुआ है, वो वैक्सीन की डोज करीब 3 महीने के बाद लगवाए। सरकार ने ये निर्देश कई स्टडी और एक्सपर्ट पैनल की सिफारिश के आधार पर जारी किए थे।

क्यों वैक्सीन के लिए रखा था तीन महीने का अंतराल?
सरकार का ये कहना था कि जो व्यक्ति कोरोना से रिकवर हुआ है, उसमें पर्याप्त एंटीबॉडी होती है। वो एंटीबॉडी करीब तीन महीने तक व्यक्ति को पुन: संक्रमण से बचा सकती है, इसलिए कोरोना से रिकवर होने वाले व्यक्ति को कम से कम तीन महीने के अंतराल पर वैक्सीन लेनी चाहिए, लेकिन सरकार के इस निर्देश का पालन होता नजर नहीं आ रहा है और इसकी वजह लोगों की लापरवाही के साथ-साथ सरकार की गलती भी है।
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इस निर्देश की हो रही है अनदेखी
सरकार ने इस निर्देश के पालन के लिए कोई ऐसी व्यवस्था नहीं की, जिससे कोरोना से रिकवर होने वाले व्यक्ति को 3 महीने बाद वैक्सीन लग सके। दिल्ली से लेकर नोएडा तक कई मरीजों के ऐसे उदाहरण हैं, जिन्होंने कोरोना को मात देने के कुछ दिन बाद ही टीका लगवा लिया। सरकार के CoWin ऐप पर इस निर्देश को अमल में लाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की है, जबकि कोरोना टेस्ट से लेकर वैक्सीन लगवाने तक आधार कार्ड दिया जाता है। इससे आपका नाम सरकारी लिस्ट में आ जाता है, लेकिन इस निर्देश की अनदेखी लगातार हो रही है।
पहला मामला
30 अप्रैल को दिल्ली के कृष्णा नगर के रहने वाले 26 वर्षीय अंश की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। 1 मई से ही सरकार ने 18-44 साल आयु ग्रुप के लोगों के लिए टीकाकरण शुरू कर दिया था। अंश और उसके 56 वर्षीय पिता ने 24 मई तक इंतजार करके वैक्सीन की पहली डोज लगवा ली। इससे पांच दिन पहले ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नए दिशा-निर्देश जारी किए थे।
अंश ने बताया कि जब उन्होंने वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन किया था तो उस वक्त ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी कि जिससे कि उन्हें इस आधार पर वैक्सीन लेने से रोका जा सके कि वो अभी-अभी कोरोना से रिकवर हुए हैं।
दूसरा मामला
दिल्ली से नोएडा तक सिर्फ अंश का ही ऐसा केस नहीं है। नोएडा के रहने वाले मेहुल चोपड़ा (बदला हुआ नाम) ने भी इसी तरह वैक्सीन की डोज प्राप्त की। 33 साल के मेहुल चोपड़ा की कोरोना रिपोर्ट 9 मई को नेगेटिव आई थी और उन्होंने 21 मई को वैक्सीन की पहली डोज प्राप्त कर ली। मेहुल ने बताया कि वैक्सीनेशन सेंटर पर उन्हें बिना किसी सवाल-जवाब के वैक्सीन की डोज दे दी गई।
तीसरा मामला
दिल्ली के मयूर विहार में रहने वाली 38 वर्षीय प्रेम लता 11 अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव हुई थीं। इसके दो हफ्ते के बाद प्रेम लता की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई गई। बाद में प्रेम लता की 63 वर्षीय मां को भी कोरोना हो गया। बाद में उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आ गई और 21 मई को प्रेम लता ने बिना किसी रोक-टोक के वैक्सन की डोज प्राप्त कर ली।












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