वयस्कों को बूस्टर डोज के तौर पर लगेगी Covovax, SII ने DCGI से मांगी मंजूरी
कोरोना वायरस संक्रमण चीन में तेजी के साथ बढ़ रहा है। इसी बीच सीरम इंस्टीट्यूट ने कोवोवैक्स को वयस्कों को बूस्टर डोज के तौर पर देने के लिए मंजूरी मांगी है।

कोरोना वायरस संक्रमण चीन, जापान सहित कई देशों में तेजी के साथ बढ़ रहा है। इसी बीच सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने अपने COVID-19 वैक्सीन- कोवोवैक्स- को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। जानकारी के मुताबिक सीरम इंस्टीट्यूट ने कोवोवैक्स को 18 वर्ष की आयु के लोगों को बूस्टर डोज के तौर पर देने के लिए DCGI की मंजूरी मांगी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार SII ने उन वयस्कों को दिए जाने वाले टीके के लिए मंजूरी मांगी है, जिन्हें कोविशील्ड या कोवाक्सिन की दो खुराक दी गई है।
आपको बता दें कि कोवोवैक्स, नोवोवैक्स इंक की तरफ से बनाया गया है। यह सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के लाइसेंस के तहत निर्मित एक कोविड वैक्सीन का स्वदेशी टीका है। इस वैक्सीन को लेकर सूत्रों ने यह भी दावा किया है कि यह एक पुनः संयोजक प्रोटीन वैक्सीन है, जो मानव शरीर को SARS-CoV-2 के खिलाफ एंटीजन बॉडी तैयार करेगा। जिससे कोरोना से लड़ाई में मदद मिलेगी।
दिसंबर 2021 में कोवोवैक्स को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मंजूरी दी गई थी। WHO की तरफ से इसकी मंजूरी इसलिए दी गई थी, ताकि कोरोनोवायरस के वेरिएंट के लिए इसका इस्तेमाल बूस्टर डोज के तौर पर किया जा सके। WHO ने एक प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा था कि कोवोवैक्स नाम का टीका, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) की तरफ से नोवावैक्स से लाइसेंस के तहत निर्मित किया गया है। इस वैक्सीन का इस्तेमाल कम आय वाले देशों में बूस्टर डोज के तौर पर किया जा सकता है।
कोवोवैक्स को लेकर SII के सीईओ अदार पूनावाला ने भी बयान जारी किया था। उन्होंने एक ट्वीट करते हुए कहा कि यह वैक्सीन कोविड-19 के खिलाफ हमारी लड़ाई में मील का पत्थर है। Covovax का अब इमरजेंसी में उपयोग किया जा सकेगा। इससे कोरोना से लड़ाई मदद मिलेगी। साथ ही उन्होंने इसके लिए WHO का भी धन्यावाद जताया।
जानें कैसे काम करता है कोवोवैक्स?
एक बार शरीर में प्रवेश करने के बाद इस वैक्सीन के नैनोकण शरीर की प्रतिरक्षा कोशिकाओं को आकर्षित करते हैं। जिससे उन्हें जल्दी और दृढ़ता से प्रतिक्रिया करने के लिए विवश किया जाता है। इसके बाद नैनोकणों को प्रतिरक्षा कोशिकाओं की मदद से ले जाया जाता है जिन्हें एंटीजन-प्रेजेंटिंग सेल के रूप में जाना जाता है। ये नैनोकण स्पाइक प्रोटीन को अलग कर देते हैं और उनकी सतह पर टुकड़े प्रदर्शित करते हैं। जिसके बाद यह शरीर की बी कोशिकाओं को सक्रिय करता है, जो एंटीबॉडीज को बाहर निकालना शुरू कर देती हैं। जब कोई वास्तविक वायरस सिस्टम को संक्रमित करने की कोशिश करता है तो नए उत्पन्न एंटीबॉडी स्पाइक प्रोटीन को सक्रिय कर देते हैं।
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