कोवैक्सीन की तुलना में ज्यादा एंटीबॉडी तैयार करती है कोविशील्ड, रिसर्च में खुलासा
नई दिल्ली, 07 जून। देश में कोरोना वायरस की रोकधाम के लिए अलग-अलग वैक्सीन लोगों को लगाई जा रही हैं। लोगों को कोविशील्ड और कोवैक्सिन लगाई जा रही हैं, ऐसे में लगातार यह सवाल उठता रहा है कि कौन सी वैक्सीन बेहतर है। इसको लेकर भारत में पहला शोध सामने आया है। जिन डॉक्टरों और नर्सों को कोविशील्ड वैक्सीन लगाई गई उनके भीतर कोरोना वायरस की एंटिबॉडी कोवैक्सीन की तुलना में अधिक बनी है। यह शोध डॉक्टर एके सिंह और उनके साथियों ने की है, जिसमे कहा गया है कि दोनों ही वैक्सीन प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करती हैं लेकिन कोवैक्सीन की तुलना में कोविशील्ड अधिक एंटिबॉडी बनाता है।
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इससे पहले जो आंकड़े सामने आए थे उसमे कहा गया था कि कोविशील्ड की पहली डोज कोरोना वायरस के खिलाफ 70 फीसदी कारगर है। लेकिन तीसरे चरण के ट्रायल के बाद जो आंकड़े सामने आए थे उसके अनुसार यह वैक्सीन 81 फीसदी कारगर है। शोध में कहा गया है कि 515 स्वास्थ्यकर्मियों पर जिसमे 305 पुरुष और 210 महिलाएं शामिल हैं उन्हें दोनों वैक्सीन दी गई। 425 लोगों को कोविशील्ड वैक्सीन दी गई है जबकि 90 लोगों को कोवैक्सीन वैक्सिन दी गई। वैक्सीन की दोनों खुराक देने के बाद 95 फीसदी लोगों में अधिक एंटिबॉडी पाई गई। जिन 425 लोगों को कोविशील्ड लगी थी उनमे 98.1 फीसदी और जिन्हें कोवैक्सीन लगी थी उनमे 80 फीसदी एंटिबॉडी पाई गई।
शोध में यह भी बात सामने आई है कि कोवाक्सिन और कोविशील्ड दोनों ही वैक्सीन मरीज के भीतर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं। दो डोज लेने के बाद सिरोपॉजिटिविटी रेट काफी बढ़ जाता है। जिन लोगों को दोनों वैक्सीन की डोज दी गई थी उसमे से 4.9 फीसदी यानियानि 27 लोगों को वैक्सीन लगने के बाद इंफेक्शन हुआ था। जिसमे से 25 लोगों को हल्का इंफेक्शन और दो लोगों को थोड़ा ज्यादा इंफेक्शन हुआ। जबकि अच्छी बात यह है कि किसी की भी कोरोना से मृत्यु नहीं हुई है।












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