कोविड 19: मुंबई के हेल्थ वर्करों के सैंपल टेस्‍ट में अचंभित कर देने वाले तथ्‍य का हुआ खुलासा

कोविड 19: मुंबई के हेल्थ वर्करों के सैंपट टेस्‍ट में अचंभित कर देने वाले तथ्‍य का हुआ खुलासा

नई दिल्‍ली। कोरोना वायरस का संक्रमण का प्रकोप थमने का नाम ही नहीं ले रहा। भारत में अभी तक 55 लाख से अधिक लोग कोरोना महामारी का शिकार हो चुके हैं। वहीं दोबारा संक्रमण पर चल रही रिसर्च में कुछ अचंभित करने वाले तथ्य सामने आए हैं।

मुंबई के 4 हेल्‍थ वर्कर पर हुआ ये शोध

मुंबई के 4 हेल्‍थ वर्कर पर हुआ ये शोध

ये रिसर्च मुंबई चार हेल्थ वर्कर पर की गईं जो एक बार कोरोना पॉजिटिव हुए और ठीक होने के बाद दोबारा से कोरोना संक्रमित हुए। चारों हेल्थ वर्करों के टेस्‍ट के बाद उन पर शोध में ये खुलासा हुआ दूसरी बार का संक्रमण पहली बार की तुलना में अत्‍यधिक गंभीर था। ऐसे में कोरोना को लेकर हमें और सावधान होने की जरुरत है। ये खुलासा दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (IGIB) और इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी (ICGEB) और बीएमसी के कस्तूरबा अस्पताल और हिंदुजा हॉस्पिटल द्वारा मिलकर किए गए शोध में सामने आए हैं।

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    Corona:मुंबई के चार हेल्थ वर्करों के सैंपलों की जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य | वनइंडिया हिंदी
    दूसरी बार का संक्रमण ज़्यादा गम्भीर और घातक था

    दूसरी बार का संक्रमण ज़्यादा गम्भीर और घातक था

    लैंसेट मेडिकल जर्नल की वेबसाइट पर प्रकाशित ये स्टडी रिपोर्ट में कई और भी अचंभित करने वाले तथ्‍यों का खुलासा हुआ। इसमें बताया गया कि मुंबई के नायर अस्पताल के तीन रेसीडेंट डॉक्टर और हिंदुजा के एक स्वस्थ्यकर्मी को मई-जून के महीने में पहली बार कोरोना संक्रमित हुए। इसके बाद ठीक होने के बाद वो दोबारा जुलाई माह में कोरोना का शिकार हुए। इन चारों स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों की जीनोम सीक्वेंसिंग में ये खुलासा हुआ कि पहले हुए संक्रमण की तुलना में दूसरी बार का संक्रमण ज़्यादा गम्भीर और घातक था हालांकि इन लोगों की कुछ दिनों बाद रिपोर्ट निगेटिव आईं और ये ठीक हो गए।

    इस कारण दोबारा दोबारा संक्रमण को भी वे आसानी से झेल गए

    इस कारण दोबारा दोबारा संक्रमण को भी वे आसानी से झेल गए

    शोध करने वाली टीम का कहना है कि इसके पीछे इनकी उम्र होगी। बता दें इन चारों की उम्र 24 से 31 वर्ष के बीच हैं, और इन्‍हें पहले से कोई शारीरिक तकलीफ़ भी नहीं थी। शायद ये एक वजह रही हो कि दोबारा संक्रमण को भी वे आसानी से झेल गए और रिकवर हो गए। रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि पहले लक्षण अगर हल्का हो तो एंटीबॉडी भी कमज़ोर बनती है जिससे दोबारा संक्रमण का ख़तरा रहता है। चूंकि स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं से जुड़े लोग कोरोना मरीजों के संपर्क में रहते हैं इसलिए ये शोध स्वास्थ्य कर्मियों के लिए चिंता दर्शाते हुए बताती है कि उन्हें दूसरी बार संक्रमण होने का खतरा अधिक है।

    कोरोना से निगेटिव लोग ये सोचकर निश्चिंत न हो कि ....

    कोरोना से निगेटिव लोग ये सोचकर निश्चिंत न हो कि ....

    डॉ स्वप्निल पारिख ने लैंसेट जर्नल में प्री पब्लिकेशन में चार लोगों में रिइन्फ़ेक्शन ने जीनोम एनालिसिस किया है। डाक्‍टरों के अनुसार कोरोना से निगेटिव लोग ये सोचकर निश्चिंत न हो कि अब अंदर एंटी बॉडी बन गई है तो डरने की ज़रूरत नहीं, ऐसा नहीं है। हमने फ़रवरी में अपनी बुक में सचेत किया था कि रिइन्फ़ेक्शन होगा। मुंबई के इन चार हेल्‍थ वर्करों पर जो रिसर्च किया गया उससे साफ हो चुका है कि एक बार कोरोना को मात दे कर पॉज़िटिव से निगेटिव हुए मरीज़ों को भी इसको लेकर अधिक सावधानी बरतने की ज़रूरत है। बता दें अभी तक माना जा रहा था कि एक बार कोरोना को मात देने के बार व्‍यक्ति को दोबारा संक्रमण होने का खतरा बहुत कम होता है लेकिन इस शोध से साबित हो चुका है कि वास्‍तविकता ये नहीं है।

    जेनेटिक सीक्वेंसिंग से ये चलता है पता

    जेनेटिक सीक्वेंसिंग से ये चलता है पता

    नायर अस्पताल से डॉ जयंती शास्त्री और ICGEB से डॉ सुधा सुनील जो इस रिसर्च में शामिल हैं उन्‍होंने बताया कि पहले संक्रमण के वायरस कुछ समय बाद पेसेन्‍ट को दोबारा संक्रमित भी कर सकते हैं, लेकिन ये केस रीइन्फ़ेक्शन का नहीं माना जाएगा क्योंकि दोबारा संक्रमण के मामले एक्सपर्ट लैब रिसर्च में जीनोम सिक्वेंसिंग के बाद ही तय करते हैं। इसमें दोबारा संक्रमित हुए मरीज़ के पहले और दूसरे स्वॉब की जेनेटिक सीक्वेंसिंग की जाती है अगर ये मालूम पड़ता है कि दोनो में भिन्नता है तब ही इसे दोबारा संक्रमण समझा जाता है।

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