कोरोना वैक्सीन के 2 डोज के बाद क्या लेना पड़ेगा बूस्टर डोज? रणदीप गुलेरिया ने दिया ये जवाब
नई दिल्ली, अगस्त 21: हालिया रिपोर्ट्स में पता चला है कि, समय के साथ कोरोना वैक्सीन की प्रभाविकता पर भी असर हो रही है। जिसके बाद एक्सपर्ट ने बूस्टर शॉट यानि तीसरे डोज की बात कही है। अब इस मामले में एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया की ओर से बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि, भारत के पास तीसरे कोरोना वायरस वैक्सीन शॉट को लेकर इस समय पर्याप्त डेटा नहीं है। जिसे बूस्टर शॉट कहा जाता है। लेकिन अधिक जानकारी अगले साल की शुरुआत तक उपलब्ध होने की संभावना है।

यहां तक कि अमेरिका, ब्रिटेन और इज़राइल सहित कई देश कोरोनोवायरस से लड़ने के लिए बूस्टर शॉट्स देने की योजना बना रहे हैं, क्योंकि विभिन्न अध्ययनों से पता चला है कि उनके टीकों की एक तीसरी खुराक से सुरक्षात्मक एंटीबॉडी का उच्च स्तर होता है। वहीं डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक भारत में अभी कोविड वैक्सीन के बूस्टर की आवश्यकता नहीं है।
हालांकि, डब्ल्यूएचओ जैसे वैश्विक निकायों ने कई विकासशील देशों में वैक्सीन असमानता की ओर इशारा करते हुए इस कदम की निंदा की है। उनका कहना है कि, कई देशों को अभी कोरोना की वैक्सीन उपलब्ध नहीं हो पा रही है। एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, रणदीप गुलेरिया ने कहा कि, मुझे नहीं लगता कि हमारे पास अभी यह कहने के लिए पर्याप्त डेटा है कि बूस्टर शॉट की आवश्यकता है। यहां तक कि बुजुर्गों और उच्च जोखिम वाले समूहों के लिए भी हमारे पास पर्याप्त डेटा नहीं है। वास्तव में हमें डेटा की आवश्यकता है जिससे आगे की रूप-रेखा तैया हो सकेगी।
उन्होंने कहा कि अभी और शोध की जरूरत है और इसमें कुछ और महीने लगेंगे। एम्स प्रमुख ने कहा, जानकारी अभी सामने आ रही है... इसमें कुछ और महीने लगेंगे। संभवत: अगले साल की शुरुआत तक, हमारे पास बूस्टर शॉट्स के प्रकार क्या होंगे और किसे इसकी जरूरत है, इस पर डेटा उपलब्ध होगा। वैश्विक स्तर पर, हम देख रहे हैं कि जिन लोगों को टीका लगाया गया है, उन्हें गंभीर बीमारी से सुरक्षा मिलती है और वे अस्पतालों में भर्ती होने वाले लोगों में भारी वृद्धि नहीं देख रहे हैं ... भारत में भी।












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