पानी की बोतल से भी कम लागत में Covaxin...फिर 1410 रु क्यों ? कृष्णा एल्ला के पुराने Video पर सवाल

नई दिल्ली, 9 जून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सोमवार को हुई घोषणा के बाद केंद्र सरकार ने मंगलवार को भारत में लगाई जा रही तीनों वैक्सीन के लिए निजी अस्पतालों की ओर से ली जाने वाली अधिकतम कीमत तय कर दी है। यानी निजी अस्पतालों के लिए जो 25 फीसदी वैक्सीन का कोटा रखा गया है, उनके लिए वह लोगों से तय कीमतों से ज्यादा नहीं वसूल सकेंगे। लेकिन, सवाल उठ रहें है कि जब पहले भारत बायोटेक की ओर से दावा किया गया था कि उसकी वैक्सीन की लागत बहुत ही मामूली होगी तो फिर उसके दाम सबसे ज्यादा क्यों रखे गए हैं। इसको लेकर कंपनी के सीएमडी का पिछले साल का एक वीडियो भी खूब वायरल हो रहा है और कांग्रेस ने इसके खिलाफ सीधे मोदी सरकार पर हमला बोल दिया है।

पानी की एक बोलत की लागत वाले दावा का क्या हुआ ?

पानी की एक बोलत की लागत वाले दावा का क्या हुआ ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सोमवार को हुई घोषणा में ही साफ कर दिया था कि वैक्सीन लगाने की एवज में वैक्सीन की कीमत के अलावा निजी अस्पताल 150 रुपये से ज्यादा सर्विस चार्ज नहीं वसूल सकेंगे। पीएम मोदी ने राज्यों से इसपर निगरानी रखने को भी कहा था। इसके बाद भी लोगों को अस्पतालों में वैक्सीन लगाने पर ज्यादा कीमत देने की दुविधा न रह जाए इसके लिए मंगलवार को केंद्र ने उसकी अधिकतम कीमत भी तय कर दी है। इसके तहत निजी अस्पताल कोविशील्ड की एक डोज के लिए ज्यादा से ज्यादा 780 रुपये, रूसी वैक्सीन स्पूतनिक के लिए 1,145 रुपये और भारत बायोटेक की देसी वैक्सीन कोवैक्सिन के लिए अधिकतम 1,410 रुपये ले सकेंगे। लेकिन, सवाल उठ रहे हैं कि जब भारत बायोटेक के एमडी ने पिछले साल देसी वैक्सीन की लागत पानी की एक बोतल से भी कम होने का दावा किया था, तब इसकी कीमत इतनी ज्यादा क्यों रखी गई है ?

25 फीसदी वैक्सीन की कीमत पर सवाल

25 फीसदी वैक्सीन की कीमत पर सवाल

गौरतलब है कि पीएम मोदी की ओर से घोषित नई वैक्सीन नीति के तहत 21 जून से वैक्सीन कंपनियों से 75 फीसदी डोज केंद्र सरकार खरीदने जा रही है। बाकी 25 फीसदी डोज निजी अस्पतालों के लिए छोड़ा गया है, जो कंपनियों से सीधे वैक्सीन खरीद सकती हैं और जो लोग पैसे देकर टीके लगवाना चाहते हैं वह निर्धारित रकम देकर प्राइवेट अस्पतालों में अपनी सुविधा के अनुसार ऐसा कर सकते हैं। लेकिन, अब इसी पर बवाल शुरू कर दिया गया है। वैसे केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से ये भी कहा कि वह सुनिश्चित करें कि छोटे अस्पतालों के साथ भी भेदभाव ना हो और उन्हें उनकी वैक्सीन का वाजिब हिस्सा समय पर उपलब्ध हो जाए। केंद्र ने एकबार फिर से वैक्सीन के लिए प्राथमिकता भी तय कर दी है, जिसमें पहले हेल्थकेयर वर्कर्स, फ्रटलाइन वर्कर्स, 45 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को जिनकी दूसरी डोज बाकी है और फिर 18 से ज्यादा उम्र वालों को देना तय किया है। यही नहीं राज्य भी अपने हिसाब से प्राथमिकताएं तय कर सकते हैं।

"जुमलों की सरकार है-जुमला ही व्यापार है ?"

अब एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें हैदराबाद स्थित कोवैक्सिन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक के सीएमडी 2020 के अगस्त में कहते सुने जा रहे हैं कि 'कोवैक्सिन की लागत पानी की एक बोतल से भी कम होगी।' जबकि, सरकार ने 8 जून को जो नोटिफिकेशन जारी किए हैं, उसके मुताबिक इसकी कीमत 1,410 रुपये होगी। अब भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास बी.वी. ने इसी आधार पर मोदी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने ट्विटर पर वह वीडियो शेयर करते हुए तंज किया है- "जुमलों की सरकार है-जुमला ही व्यापार है ?" बता दें कि जो 75 फीसदी वैक्सीन सरकारी केंद्रों पर लगाए जाएंगे वो तो बिल्कुल मुफ्त में लगेंगे, लेकिन निजी अस्पतालों में जाकर वैक्सीन लगवाने पर उसकी निर्धारित रकम का भुगतान करना होगा। और अब इसी को लेकर सियासी पंगे हो रहे हैं।

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