कोरोना की 'सुनामी': टीके के लिए पड़ोसी देशों को करना होगा इंतजार, वैक्सीन मैत्री कार्यक्रम स्थगित
नई दिल्ली, 30 अप्रैल। कोरोना वायरस की दूसरी लहर से जूझ रहे भारत को अपने विदेशी दोस्तों से काफी मदद मिली है। महामारी की पहली लहर के बाद केंद्र सरकार ने कोविड से जूझ रहे देशों की मदद के लिए 'वैक्सीन मैत्री' जिसके तहत करीब 83 देशों को भारत ने वैक्सीन की डोज दी। एक रिपोर्ट के मुताबिक निर्यात किए गए टीकों की कुल संख्या 6.45 करोड़ से अधिक थी। वर्तमान में अब भारत कोरोना की सूनामी का सामना कर रहा है जिसके चलते केंद्र सरकार ने वैक्सीन मैत्री कार्यक्रम को स्थगित कर दिया है।

गौरतलब है कि कोरोना से निपटने के लिए भारत में युद्धस्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया जा जिसके अलगे चरण की शुरूआत 1 मई से हो रही है। इस फेस में 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को टीका दिया जाएगा। हालांकि कई राज्यों ने वैक्सीन की कमी के चलते कहा है कि वह शनिवार से टीकाकरण करने में असमर्थ हैं। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार भारत में वैक्सीन की मांग को देखते हुए सरकार को अपने वैक्सीन मैत्री कार्यक्रम पर ब्रेक लगाना पड़ा। रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई से पहले भारत सरकार 'वैक्सीन मैत्री' को फिर से शुरू करने के मूड में नहीं है।
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कोरोना वायरस मामलों में वृद्धि के चलते भारत को अपने पड़ोसी देशों के साथ वाणिज्यिक और अनुदान आधारित वैक्सीन खुराक के निर्यात को स्थगित करना पड़ा है। इनमें से कुछ ऐसे देश भी है जिन्होंने पहले से ही शिपमेंट के लिए भुगतान कर दिया है और वह वैक्सीन के आखिरी बैच के इंतजार में हैं। 'वैक्सीन मैत्री' के तहत ऐसे देशों को टीके का आखिरी बैच अप्रैल की शुरुआत में भेजा जाना था लेकिन महामारी की दूसरी लहर की वजह से सरकार के निर्यात रोकना पड़ा। गुरुवार को पूछे जाने पर विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला ने कहा कि आपूर्ति कब बहाल होगी इसके लिए कोई समयसीमा नहीं दी गई है।












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