गर्भवती महिलाओं को ज्यादा नुकसान पहुंचाता है कोरोना वायरस, तुंरत इलाज मिलना बहुत जरूरी: स्टडी
गर्भवती महिलाओं को ज्यादा नुकसान पहुंचाता है कोरोना वायरस, संक्रमित होने पर तुंरत इलाज मिलना जरूरी: स्टडी
नई दिल्ली, 16 सितंबर: कोरोना वायरस संक्रमण गर्भवती महिलाओं को किसी अन्य मरीज के मुकाबले ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। वायरस गर्भवती महिला के शरीर में अपना असर ज्यादा करता है, ऐसे में गर्भवती महिला अगर संक्रमित होती है तो उसे तत्काल इलाज दिया जाना चाहिए। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के एक अध्ययन में ये बात सामने आई है। गर्भवती महिलाओं पर कोरोना वायरस के असर को लेकर आईसीएमआर का ये इस तरह का पहला अध्ययन है।

आईसीएमआर ने महाराष्ट्र में सरकारी संस्थानों और अस्पतालों के सहयोग से गर्भवती महिलाओं पर ये अध्ययन किया है। प्रेगनेंसी के दौरान कोविड की चपेट में आने वाली और बच्चे के जन्म के समय महिलाओं संक्रमित होने वाली महिलाओं की राज्य के मेडिकल कॉलेजों से मिली रिपोर्ट के आधार पर ये डाटा तैयार किया गया है।
कोरोना महामारी (मार्च 2020-जनवरी 2021) की पहली लहर के दौरान 4,203 गर्भवती महिलाओं के डेटा का विश्लेषण इस स्टडी में किया गया है। इसमें 3,213 डिलीवरी, 77 गर्भपात और 834 अन्डिलीवर्ड प्रेग्नेंसी थीं। इसमें गर्भावस्था/भ्रूण हानि का अनुपात छह प्रतिशत था।
अध्ययन के मुताबिक, 534 महिलाओं (13 प्रतिशत) में कोरोना के लक्षण थे। जिनमें से 382 (72 प्रतिशत) को हल्की, 112 (21 प्रतिशत) को मध्यम और 40 (7.5 प्रतिशत) को गंभीर लक्षण थे। गर्भवतियों तो सबसे आम परेशानी समय से पहले प्रसव 528, (16.3 प्रतिशत) और गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप 328, (10.1 प्रतिशत) थी। कुल 158 (3.8 प्रतिशत) गर्भवती और जच्चा महिलाओं को गहन देखभाल की आवश्यकता थी, जिनमें से 152 (96 प्रतिशत) कोविड संबंधित जटिलताओं की वजह से थीं।
अपनी तरह का ये पहला अध्ययन
यह महाराष्ट्र ही नहीं भारत में कोरोना के महिलाओं के गर्भ और डिलीवरी पर असर को लेकर इस तरह का पहला अध्ययन है। इसको लेकर आईसीएमआर ने कहा है कि हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि कोविड-19 गर्भवती महिलाओं को कहीं ज्यादा संक्रमित कर सकता है। ऐसे में कोरोना संक्रमित गर्भवती महिलाओं को तत्काल चिकित्सा की जरूरत होती है।












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