Covid-19: 10 राज्यों में बढ़ रहे कोरोना मामलों के पीछे SARS-CoV-2 म्यूटेशन नहीं, ये है वजह
नई दिल्ली: देश में कोरोना वैक्सीनेशन का काम युद्धस्तर पर जारी है। अब तक 1.30 करोड़ से ज्यादा लोगों को कोरोना की डोज लगाई जा चुकी है। इन सब के बीच पिछले एक हफ्ते से देश के 10 राज्यों में लगातार बढ़ रहे कोरोना के नए मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। विशेष रूप से महाराष्ट्र, पंजाब, केरल, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु में इस बात की चिंता बढ़ रही है कि नए कोरोना मामलों में उछाल SARS-CoV-2 के नए वेरिएंट से जुड़ा है या नहीं।
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मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार कोरोना मामलों आई तेजी का कारण म्यूटेशन से ज्यादा सुपर स्प्रेडर की घटनाएं हो सकती है। कर्नाटक सरकार के SARS-CoV-2 के जीनोमिक कंफर्मेश के लिए NIMHAN में न्यूरोबायोलॉजी के रिटायर प्रोफेसर डॉ. वी रवि के मुताबिक महाराष्ट्र में कोरोना के बढ़ते मामलों के पीछे कोरोना का नया स्ट्रेन है इसके कोई सबूत नहीं है। मगर सुपर स्प्रेडिंग घटनाओं से इसको ट्रिगर किया जा सकता है, जिसके कारण कम्यूनिटी स्प्रेड हुआ है और टेस्टिंग, ट्रैकिंग और ट्रेसिंग की कमी देखी जा रही है।
उनके मुताबिक वायरस हर समय म्यूटेट (वायरस के जेनेटिक मटेरियल में बदलाव होना) होते हैं और अधिक ऐसे वायरस के लिए होते हैं जिनमें आरएनए उनके कोरोनो वायरस जैसे आनुवंशिक (जेनेटिक) पदार्थ के रूप में होते हैं। अधिकांश म्यूटेशन इतने छोटे होते हैं कि वे वायरस को प्रभावित नहीं करते हैं।
कुछ मामलों में म्यूटेशन वायरस को इम्यून सिस्टम को चकमा देने, लोगों को संक्रमित करने और दोबारा फैलने की क्षमता हासिल करने में मदद करता है। उदाहरण के लिए SARS-CoV-2 वायरस महीने में एक या दो म्यूटेशन करता है। यह एचआईवी और इन्फ्लूएंजा जैसे अन्य वायरस की तुलना में सामान्य और बहुत कम है। जितना अधिक वायरस प्रसारित होता है, उतना ही इसके उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) की संभावना होती है। सामूहिक टीकाकरण के साथ चेहरे पर मास्क, हाथ की सफाई, सामाजिक दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) जैसे उपाय वायरस को फैलाने की गुंजाइश को कम करने में मदद करेंगे।
SAR-CoV-2 वायरस के दो नए वेरिएंट N440K और E484Q महाराष्ट्र और कुछ अन्य राज्यों में पाए गए हैं। सरकार ने पहले स्पष्ट किया था कि महाराष्ट्र में कोविड -19 मामलों की वर्तमान स्थिति को इन दो वेरिएंट के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। ICMR ने आगे बताया है कि इन दो वायरस वेरिएंट का अन्य देशों में भी पता लगाया गया है। भारत के कुछ राज्यों में पहले पाए गए हैं। मार्च और जुलाई 2020 तक महाराष्ट्र में E484Q स्ट्रेन का पता चला था। तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और असम में मई और सितंबर 2020 के बीच 13 अलग-अलग मौकों पर N440K म्यूटे की सूचना मिली। आईसीएमआर ने कहा कि वह स्थिति पर करीब से नजर रखे हुए है।
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