Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

कोरोना वायरस: दिल्ली के पहले मरीज़ की सलाह सुन लीजिए

रोहित दत्ता
BBC
रोहित दत्ता

भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक देश भर में कोरोना वायरस के संक्रमण के 490 से ज़्यादा मामले सामने आ चुके हैं. इस बीमारी के संक्रमण से अब तक भारत में नौ लोगों की मौत हुई है. जबकि 36 लोग इस बीमारी से रिकवरी करने में कामयाब हुए हैं.

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के कारण देश के 560 ज़िलों में लॉक डाउन है.

भारत में इस संक्रमण से पहली मौत दिल्ली में हुई थी. सोमवार को दिल्ली सरकार की तरफ से जारी रिपोर्ट में कहा गया कि दिल्ली में 30 पॉज़ीटिव मामलों की पहचान हुई है.

जिसमें से एक शख़्स की मौत हो चुकी है. वहीं पांच लोगों को इलाज के बाद छुट्टी दी जा चुकी है. 23 लोग अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं. इसके अलावा 117 संदिग्ध मरीज़ भी अस्पताल में हैं.

कोरोना वायरस
Getty Images
कोरोना वायरस

लेकिन दिल्ली में पहला केस रोहित दत्ता के रूप में सामने आया था. बीबीसी से ख़ास बातचीत में सुनिए रोहित दत्ता ने क्या कुछ बताया.

रोहित दत्ता ने बीबीसी से कहा...

मैं जैसे ही यूरोप से वापस लौटकर आया मुझे रात में बुख़ार हो गया था. मुझे 99.5 डिग्री बुख़ार था. मुझे लगा कि हो सकता है लंबे हवाई सफ़र से लौटने के कारण ऐसा हुआ हो.

उसके बाद मैंने डॉक्टर को दिखाया. डॉक्टर ने दवाई दी जिसे तीन दिन खाने के बाद भी कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा. उसके बाद 29 फरवरी को मैंने डॉक्टर को कहा कि कोरोना स्क्रीनिंग करवाना चाहता हूं. उसके अगले दिन मैंने कोरोना स्क्रीनिंग करायी. इसके बाद सरकार को एक मार्च को पता चल गया कि मैं कोरोना पॉज़ीटिव पाया गया हूं और मैं दिल्ली में कोरोना वायरस का पहला मरीज़ हूं.

इसके बाद सरकार की ओर से एक टीम मेरे घर भेज दी गई. उन सब की स्क्रीनिंग की गई जिन जिन से मैं मिला था. सभी लोगों के टेस्ट निगेटिव आए सिर्फ़ मेरा ही टेस्ट पॉज़ीटिव पाया गया था.

उन दो-तीन दिनों के दौरान मैं जिस किसी से भी मिला सभी का टेस्ट निगेटिव था. इसके बाद मुझे भर्ती किया गया और अस्पताल में मुझे जिस तरह की सुविधा मिली वो वाक़ई में विश्व-स्तर की थी.

लेकिन जो लोग अभी इस वायरस की वजह से परेशान हो रहे हैं उन्हें यह समझने की ज़रूरत है कि यह युद्ध जैसी स्थिति है. चीन में हमने देखा कि लोगों को डॉरमेट्री में-टेंट में रखा गया है. तो ऐसे में लोगों को समझना पड़ेगा कि सुविधाओं से ज़्यादा अहम है आपकी सेहत.

शुरू के तीन-चार दिन तो मेरी हालत काफ़ी ख़राब हो गई थी. मुझसे बोला तक नहीं जा रहा था. मेरे पास मेरा मोबाइल था और मैं लोगों के संपर्क में था. मैं थोड़ा ख़राब महसूस कर रहा था. लेकिन समझना तो यह भी चाहिए कि ज़रा सा भी बुखार हो जाता है तो भी जी-ख़राब होने लगता है. उस स्थिति में भी आराम करने की सलाह दी जाती है.

मैंने भी उस स्थिति में आराम किया. फिर जैसे-जैसे मैं ठीक होता गया, मुझे ठीक लगने लगा. मेरे पास मेरा मोबाइल था और फिर मैंने वहीं मूवी देखना शुरू कर दिया. किताबें पढ़नी शुरू कर दी.

मैं तो यही कहूंगा कि आइसोलेशन का जो 14 दिन का वक़्त है वो इंसान को बदल देता है. इस दौरान आदमी सोचता है कि मैंने क्या ग़लती की. मैं आज 45 साल का हूं. मैंने अपनी ज़िंदगी के बीते 30 सालों पर ग़ौर किया तो समझ आया कि ज़िंदगी तो मैंने यूं ही सिर्फ़ दौड़ने-भागने में गुज़ार दी.

जो लोग परेशान हैं उन्हें यह समझना चाहिए कि सबसे पहले डॉक्टर के पास जाएं. अपना टेस्ट करें. जितनी जल्दी जाएंगे, उतनी जल्दी लौटेंगे.

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+