Coronavirus:क्या WHO ने चीन के दबाव में Pandemic की घोषणा में देरी की ?

नई दिल्ली- अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसियों के मुताबिक दुनिया भर में कोरोना वायरस अबतक 6 हजार से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है और यह आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। एक और तथ्य ये है कि अब चीन से ज्यादा संक्रमित लोग चीन के बाहर के देशों में हो चुके हैं। महीनों तक इस वायरस के प्रकोप को छिपाए रखने वाले चीन की अब इस बात के लिए कुछ संगठन तारीफ करने लगे हैं कि उसका बुरा फेज गुजर चुका है और अब वहां नए मामलों के सामने आने की संख्या घटने लगी है। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल है कि विश्व को मौत के मुंह में ढकेलने के लिए जिम्मेदार चीन अपनी करतूतों से बच कैसे सकता है। सवालों के घेरे में आज विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी संस्था और उसके चीफ भी आ गए हैं, जिन पर चीन के इशारे पर इस बीमारी के खिलाफ उचित ऐक्शन लेने में देरी करने के आरोप लग रहे हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सबकुछ जानते-समझते हुए इसे वैश्विक महामारी घोषित करने में इतनी देर क्यों लगा दी? क्या वह चीन के इशारे और दबाव में काम कर रहा है?

कोरोना पर सवालों के घेरे में विश्व स्वास्थ्य संगठन

कोरोना पर सवालों के घेरे में विश्व स्वास्थ्य संगठन

कोरोना वायरस ने चीन के वुहान शहर में दिसंबर महीने में ही अपना प्रकोप दिखा दिया था। इस वायरस से हाहाकार मचने के बाद पूरी दुनिया को इल्म हो चुका है कि अगर चीन के कम्यूनिस्ट तानाशाहों ने शुरू में इस महामारी की गंभीरता समझी होती तो आज पूरे विश्व पर संकट के बादल नहीं मंडरा रहे होते। लेकिन सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है विश्व स्वास्थ्य संगठन की कारगुजारियों पर। जब तक कोरोना वायरस चीन में चरम पर रहा, डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों ने उतनी सक्रियता नहीं दिखाई जितनी कि उन्हें दिखानी चाहिए थी। यही वजह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन पर यह सवाल उठने लगा है कि क्या उसने चीन के दबाव में इस अंतरराष्ट्रीय संस्था को वैश्विक राजनीति का अखाड़ा बना दिया है। ये सवाल चीन से बाहर रहे कुछ चाइनीज लोग भी उठा रहे हैं और 'वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO)' को 'वुहान हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO)'बताकर तंज कस रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा इसके डायरेक्टर जनरल डॉक्टर टेड्रॉस एधानोम घेब्रेयेसस पर उंगली उठ रही है।

11 मार्च को घोषित हुई वैश्विक महामारी

11 मार्च को घोषित हुई वैश्विक महामारी

तथ्य ये है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 को पिछले 11 मार्च को वैश्वविक महामारी घोषित किया। यह वो तारीख थी, जब कोरोना वायरस एशिया से होते हुए यूरोप और मध्य पूर्व से लेकर अमेरिका के कई हिस्सों में तबाही मचा रही थी। उस दिन के डब्ल्यूएचओ के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर में चीन के वुहान से शुरू होकर यह वायरस दुनिया के 1,32,000 लाख लोगों को अपनी चपेट में ले चुका था, 123 देशों में त्राहिमाम मच चुकी थी और 5,000 से ज्यादा लोग मौत की नींद सो चुके थे। उस दिन डब्ल्यूएचओ के इथियोपियाई डीजी घेब्रेयेसस के जेनेवा स्थिति इसके मुख्यालय में कहे गए शब्द थे, 'चीन में जब महामारी चरम पर थी, उस वक्त से भी अब रोजाना (यूरोप में) नए मामले सामने आ रहे हैं।' सवाल यही उठ रहे हैं कि तो इसे महामारी घोषित करने में डब्ल्यूएचओ को अब तक किसने रोका हुआ था?

चीन की शान में कसीदे पढ़ रहे हैं डब्ल्यूएचओ चीफ

चीन की शान में कसीदे पढ़ रहे हैं डब्ल्यूएचओ चीफ

अब जरा कम्यूनिस्ट तानाशाही चीन के सरकारी न्यूज पोर्टल शिन्हुआ पर कोरोना वायरस को वैश्विक महामारी घोषित करने के ठीक एक दिन पहले छपी एक खबर पर नजर डाल लेते हैं। 10 मार्च की इस रिपोर्ट में डब्ल्यूएचओ के वही डीजी घेब्रेयेसस साहब कोरोना वायरस से निपटने के तरीके के लिए वे चीन की तारीफ में कसीदे पढ़ते दिख रहे थे और उन्होंने इसे बहुत ही प्रभावी बताया था। उनके मुताबिक, 'हमें चीन से जो अनुभव मिले हैं वह बहुत ही प्रभावशाली हैं। अब चीन में इसका प्रकोप घट रहा है और इसमें महत्वपूर्ण गिरावट आई है। वायरस को हथौड़ा मारकर उसे हटने को मजबूर कर दिया है। हमें बहुत खुशी है कि यह वापस हो रहा है और (चीन से ) वायरस की विदाई हो रही है।' इतना ही नहीं उन्होंने चीन की तारीफ करते हुए यहां तक कह दिया कि विश्व समुदाय को चीन से सीखना चाहिए, जो कि बहुत जरूरी है।

फिर अपनी चालबाजियां छिपा गया चीन !

फिर अपनी चालबाजियां छिपा गया चीन !

मतलब साफ है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तब तक कोरोना वायरस को वैश्विक महामारी नहीं घोषित किया, जबतक कि फोकस चीन से खिसक कर यूरोप की ओर शिफ्ट नहीं हुआ। क्योंकि, जब वुहान में इसका केंद्र था और तब ऐसा कर दिया जाता, तो चीन की कलई खुल जाती और उसपर अपने राजनीतिक व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी बनाने का दबाव बन सकता था। यही नहीं, चीन के लोगों की खाने-पीने की आदतों को लेकर आज जिस तरह के सवाल उठ रहे हैं, उसको लेकर भी चीनी नेतृत्व की छिछालेदार हो सकती थी। लेकिन, विश्व स्वास्थ्य संगठन की वजह से चीन एक बार फिर अपनी चालबाजियां छिपाने में कामयाब हो गया।

कोरोना का सच कभी सामने आ पाएगा ?

कोरोना का सच कभी सामने आ पाएगा ?

आज सिर्फ इस बात की चर्चा हो रही है कि चीन ने कोरोना वायरस पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया है। लेकिन, उसके चलते आज जिस तरह से पूरी दुनिया जोखिम में आ गई है, उसका जिम्मेवार कौन होगा। इस वायरस की गंभीरता पर सबसे पहले आवाज उठाने वाले चीनी डॉक्टर ली के साथ वहां की सरकार ने क्या किया, क्या इसका जवाब कभी मिल पाएगा? कोरोना वायरस से निपटने में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आलोचना करने वाले और उन्हें शक्ति का भूखा जोकल (क्लाउन) कहने वाले 'द कैनन' के नाम से मशहूर रियल एस्टेट बिजनेसमैन रेन जिकियंग के साथ क्या किया गया ? क्या उनके अचानक लापता होने भी वहां की तानाशाही कम्यूनिस्ट पार्टी का हाथ है? इन सवालों का जवाब अब शायद ही कभी मिल पाएगा।

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