एक्सपर्ट ने बताया बच्चों को कब से मिलने लगेगी कोरोनी वैक्सीन, डेल्टा वेरिएंट पर भी दी जानकारी

एक्सपर्ट ने बताया बच्चों को कब से मिलने लगेगी कोरोनी वैक्सीन, डेल्टा वेरिएंट पर भी दी जानकारी

नई दिल्ली, 11 जून: देश की नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑफ इम्युनाइजेशन (एनटीएजीआई) के अध्यक्ष डॉ. एनके अरोड़ा ने कहा है कि बहुत तेजी से फैलने वाले कोरोना के डेल्टा संस्करण का खतरा अब कम हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में दूसरी कोरोना लहर के गंभीर होने के पीछे बड़ी वजह माने जा रहा ये वेरिएंट अब कमजोर पड़ चुका है। वहीं बच्चों के लिए कोरोना की वैक्सीन को लेकर एनके अरोड़ा ने कहा कि उम्मीद है इस साल के आखिर तक बच्चों तो टीका लगना शुरू हो जाएगा।

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न्यूज-18 को दिए एक इंटरव्यू में डॉ अरोड़ा ने कहा कि जहां तक ​​डेल्टा वेरिएंट के प्रभाव का सवाल है तो भारत में इसकी जो सबसे खराब स्थिति ती वो खत्म हो गई है। कोरोना का डेल्टा वेरिएंट (बी.1.617.2) को ही भारत में दूसरी लहर के दौरान भारी तबाही की वजह माना जा रहा है। ये वेरिएंट 60 से अधिक देशों में फैल चुका है।

बच्चों को वैक्सीन पर क्या बोले

बच्चों के लिए कोरोना वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर डॉ अरोड़ा ने कहा, इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि हम वर्ष के अंत में ही या फिर अगले साल की शुरुआत में बच्चों का टीकाकरण शुरू कर देंगे। उम्मीद है कि दो से 18 साल के बच्चों के ट्रायल के रिजल्ट जल्द ही सामने आएंगे। जिसके बाद वैक्सीन देने की ओर काम शुरू हो जाएगा।

देश में वैक्सीन की कमी नहीं

डॉ अरोड़ा ने टीकाकरण की रफ्तार कम पड़ने और कई राज्यों में वैक्सीन की कमी के सवाल पर कहा, मैं भरोसा देना चाहता हूं कि देश में अब वैक्सीन की कोई कमी नहीं होगी। जैसे ही हम टीकाकरण के अगले चरण में जाएंगे, टीकों की कमी नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि सीरम इंस्टीट्यूट हर महीने 12 करोड़ वैक्सीन खुराक का उत्पादन करेगा, भारत बायोटेक 10 करोड़ खुराक हर महीने तैयार करेगा और स्पुतनिक-वी 3 से 5 करोड़ खुराक हर महीने बनाएगा। ऐसे में वक्सीन की कमी नहीं होगी।

कोविशील्ड की दो डोज के बीच अंतर बढ़ाकर तीन महीने करने को लेकर डॉ. अरोड़ा ने कहा कि हम टीकाकरण में खुराक के अंतर की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं और तीन से चार महीनों में इस पर डेटा की समीक्षा करेंगे। कोवैक्सिन के ट्रायल रिजल्ट को लेकर उन्होंने कहा कि हमने भारत बायोटेक से तीसरे फेज के रॉ क्लीनिकल ट्रायल के नतीजे देखे हैं। डेटा उपलब्ध है और प्रकाशन के लिए तैयार है।

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