एनआईएच की रिसर्च में खुलासा- प्लाज्मा थेरेपी का कोविड मरीजों पर नहीं होता कोई खास असर
एनआईएच की रिसर्च में खुलासा- प्लाज्मा थेरेपी का कोविड मरीजों पर नहीं होता कोई खास असर
नई दिल्ली, 19 अगस्त: कोरोना से ठीक हो चुके शख्स का प्लाज्मा कोविड के गंभीर मरीज को दिए जाने से कोई खास फायदा नहीं होता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) और यूएस डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेज की ओर से कराए गए क्लीनिकल ट्रायल के नतीजों में ये बात सामने आई है। इससे पहले मई में आईसीएमआर ने भी अपने अध्ययन में पाया था कि प्लाज्मा थेरेपी का कोरोना रोगियों को लाभ नहीं हुआ। जिसके बाद भारत सरकार ने उपचार की सूची से प्लाज्मा थेरेपी को हटा दिया था।

एनआईएच के एक बयान में कहा गया है कि फरवरी में परीक्षण रोक दिया गया था क्योंकि यह संक्रमण में अपेक्षित रूप से प्रभावी नहीं रहा। एनआईएच ने कहा है कि उसकी ओर से इस तरह के और अध्ययनों के लिए फंड जारी किए जा रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि कोरोना रोगियों को तेजी से ठीक होने में कौन से तरीके मदद कर सकते हैं।
द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित ट्रायल पेपर में कहा गया है कि यह हमारे लिए आश्चर्य की बात थी। चिकित्सकों के रूप में, हम चाहते थे कि यह गंभीर बीमारी को कम करने में एक बड़ा बदलाव लाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
आईसीएमआर ने भी माना था प्लाज्मा थेरेपी फेल
भारत में कोरोना की दूसरी लहर शुरू होने के बाद प्लाज्मा की डिमांड काफी बढ़ गई थी। लोग कोरोना वायरस से ठीक हो चुके लोगों से प्लाज्मा डोनेट करने की गुहार लगाते नजर आए थे। कोविड के इलाज को लेकर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने कहा था कि कोरोना लक्षण दिखने के सात दिनों के भीतर प्लाज्मा थेरेपी का ऑफ-लेबल इस्तेमाल किया जा सकता है। बाद में आईसीएमार ने अपनी रिसर्च में पाया कि थेरेपी के इलाज पर किसी तरह का असर नहीं होता है। मरीज को लाभ ना होने की बात सामने आन के बाद सरकार ने फैसला लिया कि ट्रीटमेंट से प्लाज्मा थेरेपी को बाहर कर दिया जाए। इसके बाद सरकार ने कोरोना के इलाज की गाइडलाइन से प्लाज्मा थेरेपी को हटा दिया। अब एनआईएच और यूएस डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ की ओर से कराए गए क्लीनिकल ट्रायल के नतीजों में भी यही बात सामने आई है।












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