AY.4.2 वेरिएंट और त्योहारी सीजन की लापरवाही पड़ सकती है भारी, क्या तीसरी लहर की ओर बढ़ रहा भारत?

नई दिल्ली, 2 नवम्बर। देश में भले ही रोजाना आने वाले कोरोना वायरस मामलों की संख्या कम हो रही हो लेकिन त्योहारी सीजन समाप्त होने के बाद कोरोना मामलों में संभावित वृद्धि को लेकर विशेषज्ञों में चिंता बनी हुई है। बस कुछ ही दिन बाद देशभर में बड़े उल्लास के साथ मनाया जाने वाला दीपावली का त्योहार है जिसे लेकर बाजारों में भारी भीड़ बनी हुई है। इस दौरान लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग और कोविड प्रोटोकॉल की जमकर अवहेलना करते हुए देखा जा रहा है। इसके साथ ही देश में बीते अप्रैल-मई में हाहाकार मचाने वाले डेल्टा वेरिएंट का एक नया संस्करण एवाई.4.2 संस्करण भी सामने आया है जिसे लेकर कहा जा रहा है कि यह भविष्य में तीसरी लहर के फैलने का एक कारण हो सकता है।

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    हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि एवाई.4.2 संस्करण से तीसरी लहर फैलने की संभावना के समर्थन में अब बहुत कम डेटा उपलब्ध हैं। ऐसे में एक नजर भारत और दुनिया में कोविड-19 की स्थिति पर डालते हैं।

    क्या है एवाई.4.2 वेरिएंट?
    कोरोना वायरस का एवाई.4.2 वेरिएंट उसी परिवार से संबंधित है जिसे डेल्टा या बी.1.617.2 के नाम से जाना जाता है। कोरोना के इस वेरिएंट को सबसे पहले पिछले साल अक्टूबर में भारत में पहचाना गया था और यह देश में कहर बरपाने वाली दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार था। यह डेल्टा वेरिएंट की ही एक उपशाखा है। अभी तक डेल्टा वेरिएंट में 55 उपशाखाएं मिल चुकी हैं।

    कोविड-19 के एवाई.4.2 को पहली बार इसी जुलाई में ब्रिटेन में रिपोर्ट किया गया था लेकिन हाल के दिनों में इस सबवेरिएंट से जुड़े मामलों में वृद्धि देखी गई है। वहीं शोधकर्ताओं में ज्यादातर इस बात पर सहमति है कि यह सबवेरिएंट अधिक संक्रामक है लेकिन अभी तक इसमें तत्काल चिंता करने वाला कोई लक्षण नहीं देखा गया है।

    डब्ल्यूएचओ का क्या है कहना?
    विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार AY.4.2 प्रकार के मामलों की संख्या दुनिया भर में बढ़ रही है। हाल ही में डब्ल्यूएचओ ने कहा था कि एआई.4.2 संस्करण के कुल 26,000 मामलों का पता चला है। यह मूल डेल्टा वेरिएंट की तुलना में कम से कम 15 प्रतिशत अधिक संक्रामक है।

    भारत में चिंता का कारण
    भारत में इसी साल अप्रैल और मई में कोरोना वायरस के कहर को देखा है जब अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं और मेडिकल ऑक्सीजन की भयंकर कमी हो गई थी जिसके चलते मौत के रिकॉर्ड मामले सामने आए। आज भी उस दौर की यादें लोगों के जेहन से उतरी नहीं हैं। हालांकि उसके बाद बड़ी मात्रा में वैक्सीनेशन और कोविड निरोधी उपायों के चलते संक्रमण के मामले में कमी आई है लेकिन राज्यों ने त्योहारों के मौसम में मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने पर जोर दिया है क्योंकि दिवाली के बाद कोरोना के मामले में वृद्धि की भविष्यवाणी की गई है। इसके पहले केरल में ओणम पर्व के दौरान कोरोना मामलों में वृद्धि देखी जा चुकी है।

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