ऑक्‍सफोर्ड वैक्‍सीन के नतीजों पर संदेह, कंपनी ने खुद माना- मैन्‍युफैक्‍चरिंग में हुई गलती

ऑक्‍सफोर्ड ने मानी कोरोना वैक्‍सीन मैन्‍युफैक्‍चरिंग में गलती की बात, नतीजे सवालों में

नई दिल्ली। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्‍ट्राजेनेका ने अपनी कोरोना वैक्‍सीन AZD1222 के तीसरे फेज के ट्रायल के नतीजों की हाल ही में जानकारी दी थी। कंपनी ने कहा था कि वैक्सीन के ट्रायल रिजल्ट बढ़िया रहे हैं और ये कोरोना संक्रमण से बचाव में 70 फीसदी तक असरदार है। अब ये वैक्सीन संदेह के घेरे में आ गई है क्योंकि इसकी मैन्युफैक्चरिंग में गलती की बात सामने आई है। एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड ने भी वैक्सीन में मैन्युफैक्चरिंग एरर को स्वीकार किया है, जिससे वैक्सीन के स्टडी रिजल्ट पर सवाल उठ रहे हैं।

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    इसलिए उठे वैक्सीन पर सवाल

    इसलिए उठे वैक्सीन पर सवाल

    ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्‍ट्राजेनेका ने कहा था कि जिन लोगों को इस वैक्सीन का हाफ डोज मिला और फिर एक महीने बाद फुल डोज मिला, उनमें इस वैक्सीन का प्रभाव 90 प्रतिशत तक देखने को मिला। जिन लोगों को दो बार फुल डोज दी गई उनमें सिर्फ 62 प्रतिशत प्रभाव देखने को मिला। इसका औसत 70 फीसदी रहा है। इसको लेकर सवाल उठे तो अब कंपनी की ओर से कहा गया है कि इसकी मैन्युफैक्चरिंग की शुरुआत में कुछ गलती हुई।

     ट्रायल में अलग-अलग रिजल्ट मिले

    ट्रायल में अलग-अलग रिजल्ट मिले

    ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका ने 23 नवंबर को जारी बयान में कहा था कि यूके और ब्राजील में किए गए ट्रायल में उनकी वैक्सीन असरदार पाई गई। आधी डोज दिए जाने पर वैक्सीन 90 फीसदी तक इफेक्टिव मिली। इसके बाद दूसरे महीने में फुल डोज दिए जाने पर 62 फीसदी असरदार देखी गई। इसके एक महीने बाद दो फुल डोज देने पर वैक्सीन का असर 70 फीसदी देखा गया।

    भारत में सीरम इंस्टीट्यूट बना रहा है ये वैक्सीन

    भारत में सीरम इंस्टीट्यूट बना रहा है ये वैक्सीन

    ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन में देरी का भारत पर भी सीधा असर होगा। भारत में यह वैक्सीन पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया बना रहा है। भारत में कोरोना वैक्सीन के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ सीरम इंस्टिट्यूट ने करार किया है। सीरम ने एस्‍ट्राजेनेका से वैक्‍सीन की 100 करोड़ डोज की डील की है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में यह वैक्‍सीन 'कोविशील्‍ड' नाम से बन रही है। माना जा रहा है कि तीसरे दौर के ट्रायल के सफल रहने के बाद ऑक्‍सफर्ड और एस्‍ट्राजेनेका की वैक्‍सीन को अगर यूके ड्रग रेगुलेटर से इमर्जेंसी अप्रूवल मिलता है तो दिसंबर से यह वैक्‍सीन उपलब्‍ध हो सकती है। हालांकि अब नतीजों पर उठे सवाल के बाद हो सकता है कि इसके आने में देर हो।

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