इस नई रणनीति के तहत होगा कोरोना के मरीज़ों का इलाज

प्रतीकात्म तस्वीर
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भारत में कोरोना वायरस के मामले दिन पर दिन बढ़ते जा रहे हैं. लॉकडाउन के बाद भी मामले बढ़ने की रफ़्तार तेज़ हो गई है.

अब तक भारत में संक्रमण के 5194 मामले आ चुके हैं. इनमें से 149 लोगों की मौत हो चुकी है.

मरीज़ बढ़ने के साथ ही देश में स्वास्थ्य सुविधाओं पर बोझ बढ़ता जा रहा है और सरकार इस फैलाव को रोकने के लिए नए-नए तरीके अपना रही है.

संसाधनों का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करने और संक्रमण के नए मामलों में इलाज़ के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने खास तरह की रणनीति बनाई है. इसके लिए हेल्थ फैसिलिटिज को तीन भागों में बांटा गया है. (https://www.mohfw.gov.in/pdf/FinalGuidanceonMangaementofCovidcasesversion2.pdf)

कोविड केयर सेंटर, डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर और डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल.

इन तीनों सेंटर्स में मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए संक्रमित मरीज़ों और संदिग्धों का इलाज़ किया जाएगा. संदिग्ध वो मरीज़ हैं जिनमें कोरोना वायरस जैसे लक्षण तो हैं लेकिन अभी बीमारी की पुष्टि नहीं हुई है.

स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने मंगलवार को इस बारे में जानकारी देते हुए बताया, “एक बहुत ही महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट हमने अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया है. इस डॉक्यूमेंट के तहत कोविड के मरीज़ों को मैनेज करने के लिए अस्पतालों और फैसिलिटीज़ को हमने वर्गीकृत किया है. इसमें डैडिकेटेड फैसिलिटीज़ को तीन भागों में बांटा गया है. इसके ज़रिए हम राज्यों और अस्पतालों को ये दिशा निर्देश उपलब्ध कराना चाहते हैं कि हमें कैसे तीन स्तरों पर मामले संभालने हैं.”

मरीज़ों की भी तीन श्रेणियां

कोरोना वायरस के मरीज़ों को माइल्ड (हल्के लक्षण), मॉडरेट (मध्यम लक्षण), और सीवर (गंभीर लक्षण) की श्रेणी में बांटा गया है. इन्हीं लक्षणों के आधार पर मरीज़ों को अलग-अलग सेंटर में भेजा जाएगा.

ये सेंटर कैसे काम करेंगे ये बताने से पहले जानते हैं कि मरीज़ों की तीन श्रेणियों का क्या मतलब हैं-

माइल्ड मामले- जिन मामलों में बुखार और/या फ्लू जैसे लक्षण जुक़ाम, खांसी आदि हो.

मॉडरेट मामले- निमोनिया हो लेकिन गंभीर बीमारी के लक्षण ना हों. श्वसन दर 15 से 30 प्रति मिनट यानी आप एक मिनट में 15 से 30 बार सांस ले रहे हों.

सीवर मामले- गंभीर निमोनिया या एआरडीएस या सेप्टिक शॉक हो और श्वसन दर प्रति मिनट 30 या उससे ज़्यादा हो.

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कोविड केयर सेंटर

अगर किसी के माइल्ड यानी हल्के-फुल्के लक्षण हैं तो उसमें संदिग्ध और संक्रमित दोनों तरह के मरीज़ों को कोविड केयर सेंटर में भेजा जाएगा.

मंत्रालय के डॉक्यूमेंट में बताया गया है कि भारत में कोविड-19 के 70 प्रतिशत मरीज़ों में हल्के या बहुत ही हल्के लक्षण पाए गए हैं.

कोविड केयर सेंटर में होटल, हॉस्टल्स, स्कूल, स्टेडियम और लॉज़ आदि शामिल हो सकते हैं. ज़रूरत पड़ने पर मौजूदा क्वारंटीन फैसिलिटी को भी कोविड केयर सेंटर्स में बदला जा सकता है.

ऐसे सेंटर्स में संक्रमित और संदिग्ध मरीज़ों के लिए अलग-अलग सेक्शन बनाए जाएंगे. इनमें आने-जाने का रास्ता अलग होगा ताकि जिनके टेस्ट नेगेटिव आएं उन्हें संक्रमण से बचाया जा सके.

जहां तक संभव हो कोविड केयर सेंटर में भर्ती लोगों को अलग-अलग कमरा देने की कोशिश की जाएगी.

इस तरह के सेंटर पर बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस चौबीस घंटे मौजूद रहेगी ताकि किसी मरीज़ का मामला गंभीर होने पर उसे बेहतर इलाज़ के लिए दूसरे सेंटर पर सुरक्षित भेजा जा सके.

यहां कैसे होगा इलाज

· कोविड केयर सेंटर पर संदिग्ध मामलों में कोविड-19 का टेस्ट होगा और नतीजे आने तक मरीज़ों को यहीं पर रखा जाएगा. इन्हें पुष्टि हो चुके मामलों से अलग रखा जाएगा.

· अगर कोई टेस्ट में कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया तो उसे संक्रमित मरीज़ों के सेक्शन में भेज दिया जाएगा.

· अगर टेस्ट नेगेटिव आता है तो मरीज़ को उसके लक्षण के अनुसार इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया जाएगा.

· अगर कोविड केयर सेंटर में भर्ती किये गये किसी मरीज़ के लक्षण और ज़्यादा गंभीर हो जाते हैं. वो मॉडरेट या सीवर की श्रेणी में आ जाता है तो उसे इन मामलों के लिए निर्धारित सेंटर्स में भेजा जाएगा.

· चिकित्सकीय देखभाल के अलावा इन सेंटर्स में स्थानीय प्रशासन द्वारा खाना, साफ-सफाई की सुविधाएं और काउंसलिंग आदि उपलब्ध कराई जाएगी.

डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर (डीसीएचसी)

अगर किसी में मॉडरेट किस्म के लक्षण पाए जाते हैं (ना हल्के लक्षण और ना अति गंभीर), ऐसे संक्रमित और संदिग्ध मरीज़ों को डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर में भेजा जाएगा.

पूरे हॉस्पिटल या उसके एक ब्लॉक में भी ऐसे सेंटर्स बनाए जा सकते हैं. इनमें अलग प्रवेश और निकासी की व्यवस्था होगी. निजी अस्पतालों को भी डीसीएचसी बनाया जा सकता है.

इन सेंटर्स में भी संक्रमित और संदिग्ध मरीज़ों को संपर्क में आने से बचाने के लिए अलग-अलग रखा जाएगा. इन अस्पतालों में ऑक्सीजन सपोर्ट वाले बेड मौजूद होंगे.

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इस तरह के सेंटर पर बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस चौबीस घंटे मौजूद रहेगी.

कैसे होगा इलाज

· यहां मरीज़ों को भर्ती करके उनकी निगरानी और टेस्ट किया जाएगा. संदिग्ध मरीज़ अगर पॉजिटव पाए जाते हैं तो उन्हें संक्रमित मरीज़ों के सेक्शन में भेज दिया जाएगा.

· अगर कोई मरीज़ नेगेटिव पाया जाता है तो उसे ऐसे अस्पताल में शिफ्ट किया जाएगा जहां पर कोविड के मरीज़ नहीं आते और अन्य बीमारियों के लिए इलाज़ किया जाता है.

· अगर यहां भर्ती किसी मरीज़ के लक्षण गंभीर हो जाते हैं तो उसे डेडिकेटेड कोविड अस्पताल में शिफ्ट किया जाएगा.

डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल (डीसीएच)

ये हॉस्पिटल गंभीर मामलों में इलाज के लिए बनाए गए हैं. इनमें भी संक्रमित और संदिग्ध दोनों तरह के मरीज़ भर्ती किए जाएंगे जिन्हें अलग-अलग रखा जाएगा.

पूरे अस्पताल या उसके एक ब्लॉक को डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा. इनमें अलग प्रवेश और निकासी की व्यवस्था होगी. निजी अस्पतालों को भी डीसीएच बनाया जा सकता है.

इन अस्पतालों में आईसीयू, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सपोर्ट वाले बेड होंगे.

कैसे होगा इलाज

· यहां पर संक्रमित मरीज़ों को सीधे आईसीयू में रखा जाएगा. जो संदिग्ध मरीज़ हैं वो भी कोविड19 टेस्ट के नतीजे आने तक आईसीयू में ही भर्ती होंगे.

· अगर टेस्ट पॉजिटिव आता है तो मरीज़ का आईसीयू में ही रखकर इलाज़ किया जाएगा. टेस्ट नेगेटिव आने पर ज़रूरत के मुताबिक इलाज़ होगा.

पिछले हफ़्ते के मुक़ाबले इस हफ़्ते भारत में कोरोना वायरस के ज़्यादा मामले पाए गए हैं.

स्वास्थ्य मंत्रालय हॉटस्पॉट, बफर ज़ोन और ज़िला स्तर पर कंटेनमेंट प्लान बनाकर महामारी के संक्रमण को रोकने की कोशिश कर रहा है.

पूरे विश्व में युद्ध स्तर पर कोरोना वायरस से लड़ाई ज़ारी है. अब तक पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के संक्रमण के 14 लाख से ज़्यादा मामले आ चुके हैं.

संक्रमण से दुनिया में 81 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. हालांकि, एक लाख के करीब मरीज़ ठीक भी हुए हैं. भारत में भी 400 से ज़्यादा मरीज़ कोरोना वायरस से पूरी तरह ठीक हो चुके हैं.

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